लोड हो रहा है...
ब्रेकिंग न्यूज़
खबरें लोड हो रही हैं...
हमें फॉलो करें :

पीलीभीत में महंत का समाधि ऐलान

पीलीभीत के बिलसंडा में महंत सत्यगिरि का आश्रम

पीलीभीत में महंत सत्यगिरि का 2 अक्टूबर को जिंदा समाधि का ऐलान, लंगड़े बाबा आश्रम के जीर्णोद्धार की मांग

पीलीभीत में महंत का समाधि ऐलान

पीलीभीत के बिलसंडा क्षेत्र में श्री लंगड़े बाबा आश्रम और उसके जीर्णोद्धार से जुड़ा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। जूना अखाड़े के महंत सत्यगिरि महाराज ने अपनी मांगों को लेकर 2 अक्टूबर को ‘जिंदा समाधि’ लेने का ऐलान किया है। महंत का कहना है कि वह लंबे समय से आश्रम के जीर्णोद्धार समेत कई बुनियादी सुविधाओं की मांग उठा रहे हैं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से उन्होंने यह कदम उठाने की घोषणा की है।

महंत के इस ऐलान के बाद प्रशासन के सामने स्थिति संवेदनशील हो गई है। उन्होंने 2 अक्टूबर को लंगड़े बाबा आश्रम से नगर प्रवेश यात्रा निकालने और इसके बाद शाम करीब 5 बजे समाधि लेने की बात कही है। महंत ने प्रशासन से यात्रा में किसी तरह की बाधा नहीं डालने और शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने की अपील भी की है।

लंगड़े बाबा आश्रम के जीर्णोद्धार को लेकर लंबे समय से मांग

बिलसंडा के मझगवां क्षेत्र में स्थित श्री लंगड़े बाबा देवस्थल के जीर्णोद्धार का मुद्दा नया नहीं है। महंत सत्यगिरि पहले भी आश्रम की स्थिति और वहां उपलब्ध सुविधाओं को लेकर प्रशासन के सामने अपनी मांग रख चुके हैं।

महंत की ओर से आश्रम के जीर्णोद्धार के साथ रास्ते, पुलिया और अन्य बुनियादी सुविधाओं को विकसित करने की मांग उठाई जाती रही है। जून 2026 में भी इसी मुद्दे को लेकर उनके अनशन और समाधि की घोषणा सामने आई थी। उस समय प्रशासनिक अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद उन्होंने समाधि लेने का निर्णय टाल दिया था, हालांकि अनशन जारी रखने की बात कही थी।

जून में भी सामने आया था ऐसा ही मामला

उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक जून में महंत सत्यगिरि ने मंदिर के जीर्णोद्धार की मांग पूरी नहीं होने पर समाधि लेने की घोषणा की थी। उन्होंने इसके लिए स्थान भी तैयार कराया था और संतों की मौजूदगी में भूमि पूजन किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर महंत से बातचीत की थी। अधिकारियों के समझाने के बाद उन्होंने उस समय अपना निर्णय टाल दिया था। रिपोर्टों में यह भी सामने आया था कि आश्रम के जीर्णोद्धार और रास्ते से जुड़े काम को लेकर प्रशासन स्तर पर आगे की प्रक्रिया की बात कही गई थी।

अब 2 अक्टूबर की घोषणा से फिर बढ़ी प्रशासन की चिंता

अब महंत ने एक बार फिर 2 अक्टूबर की तारीख घोषित की है। उनके मुताबिक उस दिन आश्रम से नगर प्रवेश यात्रा निकाली जाएगी और शाम करीब 5 बजे वह ‘जिंदा समाधि’ लेने का निर्णय लागू करेंगे।

महंत की घोषणा के बाद स्थानीय प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था के साथ-साथ उनकी सुरक्षा को लेकर भी चुनौती खड़ी हो सकती है। ऐसे मामलों में प्रशासन के लिए प्राथमिकता किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकना और संबंधित व्यक्ति से बातचीत के जरिए स्थिति को शांत रखना होती है।

फिलहाल महंत की ओर से की गई घोषणा के बाद प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।

महंत का दावा- करीब पांच महीने से चल रहा अनशन

महंत सत्यगिरि का दावा है कि वह करीब पांच महीने से अपनी मांगों को लेकर अनशन कर रहे हैं। उनका कहना है कि लंगड़े बाबा आश्रम के जीर्णोद्धार के साथ वहां आने-जाने वाले लोगों के लिए बेहतर सुविधाओं की जरूरत है।

महंत का आरोप है कि उनकी मांगों को लेकर पहले भी अधिकारियों की ओर से आश्वासन दिए गए, लेकिन अपेक्षित स्तर पर काम आगे नहीं बढ़ सका। इसी को लेकर उन्होंने दोबारा आंदोलन तेज करने का फैसला किया है।

जून में प्रकाशित रिपोर्टों में भी उनके लंबे समय से अनशन पर रहने और आश्रम के जीर्णोद्धार, रास्ते तथा पुलिया जैसे कार्यों की मांग करने का उल्लेख मिला था।

नगर प्रवेश यात्रा निकालने की बात

महंत ने 2 अक्टूबर को लंगड़े बाबा आश्रम से नगर प्रवेश यात्रा निकालने की बात कही है। उनके अनुसार यात्रा के बाद शाम के समय वह अपने घोषित निर्णय की ओर बढ़ेंगे।

उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि यात्रा में किसी प्रकार की बाधा न डाली जाए और कार्यक्रम के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग किया जाए। हालांकि प्रशासन की ओर से इस घोषणा के संबंध में क्या तैयारी की जा रही है, इसकी विस्तृत जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

पहले भी प्रशासन ने बातचीत से टाला था संकट

जून में जब महंत ने इसी तरह की घोषणा की थी, तब प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर उनसे बातचीत की थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अधिकारियों के समझाने के बाद उन्होंने उस समय समाधि लेने का फैसला स्थगित कर दिया था। इसके साथ ही अनशन जारी रखने की बात कही गई थी।

यह घटनाक्रम बताता है कि आश्रम के जीर्णोद्धार से जुड़ा विवाद कई महीनों से चला आ रहा है। अब 2 अक्टूबर की नई घोषणा के बाद प्रशासन के सामने एक बार फिर संवाद और सुरक्षा व्यवस्था का सवाल है।

आश्रम की सुविधाओं का मुद्दा भी जुड़ा है

महंत की मांग केवल मंदिर के जीर्णोद्धार तक सीमित नहीं बताई गई है। पूर्व में सामने आई जानकारी के मुताबिक उन्होंने आश्रम तक पक्का रास्ता, पुलिया और शौचालय जैसी सुविधाओं की मांग भी रखी थी। इन सुविधाओं का संबंध धार्मिक स्थल पर आने वाले श्रद्धालुओं और वहां रहने वाले लोगों की दैनिक जरूरतों से भी जुड़ा हुआ है।

महंत का कहना है कि इन मांगों पर ठोस काम होने से आश्रम और आसपास के क्षेत्र में आने वाले लोगों को सुविधा मिलेगी।

प्रशासन के अगले कदम पर नजर

2 अक्टूबर की घोषणा के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल प्रशासन की प्रतिक्रिया को लेकर है। महंत ने अपनी मांगों को लेकर स्पष्ट रूप से समय और कार्यक्रम की घोषणा की है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन के सामने बातचीत, कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कदम उठाने की चुनौती है।

वहीं, महंत की मांगों और प्रशासन की ओर से अब तक उठाए गए कदमों की स्थिति भी इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण होगी। यदि दोनों पक्षों के बीच बातचीत से कोई रास्ता निकलता है तो स्थिति को शांत किया जा सकता है।

फिलहाल पीलीभीत के बिलसंडा में लंगड़े बाबा आश्रम से जुड़ा यह मामला प्रशासन, स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। 2 अक्टूबर को प्रस्तावित नगर प्रवेश यात्रा और महंत की घोषणा को देखते हुए प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

कानपुर विकास प्राधिकरण कार्यालय और कथित अनियमितताओं से जुड़ी खबर

कानपुर विकास प्राधिकरण में कथित अनियमितताओं पर उठे सवाल, बर्खास्त कर्मचारी राकेश रावत ने लगाए गंभीर आरोप कानपुर

कानपुर विकास प्राधिकरण में कथित वित्तीय अनियमितताओं और बर्खास्तगी को लेकर पूर्व कर्मचारी राकेश रावत ने सवाल उठाए हैं। मामले में निष्पक्ष जांच और आधिकारिक जवाब की मांग महत्वपूर्ण है।

कानपुर: डॉ. संजय काला की टीम का कमाल! हैलट में जटिल ऑपरेशन कर निकालीं 70 पथरियां

कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने जटिल ऑपरेशन कर 46 वर्षीय मरीज की मुख्य पित्त नली से करीब 70 पथरियां निकालीं। इससे पहले दो ओपन सर्जरी और चार ईआरसीपी प्रयास सफल नहीं हुए थे।

नरेंद्र शर्मा परवाना की भारतीय प्रेस परिषद की सदस्यता तक की प्रेरणादायक यात्रा और 64 वर्षों के जीवन अनुभव

नरेंद्र शर्मा परवाना के 64 वर्षों के अनुभव की कहानी

नरेंद्र शर्मा परवाना का 64 वर्षों का जीवन सफर संस्कार, सेना में सेवा, साहित्य साधना और पत्रकारिता के संघर्ष की प्रेरक कहानी है। भारतीय प्रेस परिषद की सदस्यता तक पहुंचने का उनका सफर मेहनत, अनुशासन और जिम्मेदारी का संदेश देता है।