लोड हो रहा है...
ब्रेकिंग न्यूज़
खबरें लोड हो रही हैं...
हमें फॉलो करें :

CJP विवाद: रांका के आरोपों पर दिल्ली पुलिस का वीडियो

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके की दादी के निधन को लेकर दिल्ली पुलिस और पार्टी नेताओं के बीच विवाद गहरा गया है। CJP नेता आशुतोष रांका ने पुलिस पर संवेदनहीन तरीके से सूचना देने और दीपके के साथ उचित व्यवहार नहीं करने के आरोप लगाए। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने एक वीडियो जारी कर अपना पक्ष सामने रखा। पुलिस का कहना है कि दीपके को उनकी दादी के निधन की जानकारी दी गई थी और अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए महाराष्ट्र जाने में सहायता की पेशकश भी की गई थी।

 

हालांकि, अभिजीत दीपके ने पुलिस के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें अपने फोन और वकील से संपर्क करने की सुविधा नहीं दी गई। ऐसे में यह मामला अब केवल निधन की सूचना दिए जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि हिरासत के दौरान परिवार से संपर्क और मानवीय व्यवहार के सवाल भी चर्चा में हैं।

 

आशुतोष रांका ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

CJP नेता आशुतोष रांका ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। उनके आरोपों के अनुसार, अभिजीत दीपके को उनकी दादी के निधन की सूचना देने के दौरान संवेदनशीलता का ध्यान नहीं रखा गया। पार्टी की ओर से यह मुद्दा भी उठाया गया कि दीपके को परिवार से संपर्क करने और अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए था।

 

रांका के आरोपों ने हिरासत में मौजूद व्यक्ति के साथ व्यवहार और पारिवारिक आपात स्थिति में प्रशासन की जिम्मेदारी को लेकर बहस छेड़ दी है। हालांकि, आरोपों के प्रत्येक पहलू की स्वतंत्र पुष्टि होना जरूरी है। पुलिस के स्पष्टीकरण और संबंधित वीडियो को भी इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

 

दिल्ली पुलिस ने जारी किया वीडियो

11 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें पुलिस की ओर से अभिजीत दीपके को उनकी दादी के निधन की जानकारी दिए जाने का दृश्य सामने आया। पुलिस ने इस वीडियो के माध्यम से CJP की ओर से लगाए गए आरोपों का जवाब देने की कोशिश की।

 

दिल्ली पुलिस की जनसंपर्क अधिकारी एवं DCP नेहा यादव के अनुसार, निधन की जानकारी मिलने के बाद दीपके को संवेदनशीलता के साथ इसकी सूचना दी गई। पुलिस का दावा है कि उन्हें परिवार से बात करने और महाराष्ट्र स्थित अपने घर जाने के लिए यात्रा संबंधी सहायता उपलब्ध कराने की पेशकश भी की गई थी।

 

पुलिस के मुताबिक, दीपके ने इस सहायता का लाभ नहीं लिया। अधिकारियों ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि उनका उद्देश्य पारिवारिक परिस्थिति में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना था। पुलिस द्वारा जारी वीडियो को इसी दावे के समर्थन में पेश किया गया है।

 

अभिजीत दीपके ने पुलिस के दावे पर क्या कहा?

दिल्ली पुलिस के वीडियो के बाद अभिजीत दीपके ने भी अपना पक्ष रखा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उन्हें अपना फोन इस्तेमाल करने और वकील से संपर्क करने की अनुमति नहीं मिली।

 

दीपके का कहना है कि वह अपने उस कजिन से बात करना चाहते थे, जो गांव में उनकी दादी के साथ रहते थे। इसके लिए उन्होंने फोन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, लेकिन उनके मुताबिक उन्हें फोन नहीं दिया गया। उन्होंने देर रात करीब 3:30 बजे अपने पिता से संपर्क करने के लिए कहे जाने के तरीके पर भी सवाल उठाए।

इस तरह पुलिस और दीपके के बयानों में परिवार से संपर्क करने की सुविधा को लेकर अंतर दिखाई देता है। पुलिस इसे सहायता की पेशकश बता रही है, जबकि दीपके का कहना है कि उन्हें अपने फोन और संपर्कों तक पहुंच नहीं मिली। इन दोनों दावों की पूरी स्थिति समझने के लिए वीडियो के संदर्भ और हिरासत के दौरान हुई बातचीत को ध्यान में रखना जरूरी है।

 

दादी के निधन के समय हिरासत में थे CJP प्रमुख

 

यह घटनाक्रम 10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से जुड़ा है। CJP संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ पार्टी के नेता आशुतोष रांका और सौरव दास को दिल्ली पहुंचने के बाद विमान से हिरासत में लिया गया था। पार्टी का प्रदर्शन जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित था।

 

रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी और निषेधाज्ञा सहित संबंधित प्रतिबंधों का हवाला दिया था। इसके बाद तीनों नेताओं को हिरासत में लिया गया। अगले दिन उन्हें कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने के बाद रिहा कर दिया गया।

 

इसी दौरान महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में अभिजीत दीपके की 85 वर्षीय दादी सावित्रीबाई दीपके का निधन हो गया। परिवार और पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया कि हिरासत के कारण दीपके अपनी दादी के अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार में समय पर शामिल नहीं हो सके।

 

विवाद का केंद्र अब क्या है?

इस पूरे मामले में दो अलग-अलग प्रश्न सामने आते हैं। पहला, क्या अभिजीत दीपके को उनकी दादी के निधन की सूचना समय पर दी गई और क्या उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए व्यावहारिक सहायता उपलब्ध कराई गई? दूसरा, क्या हिरासत के दौरान उन्हें अपने परिवार और वकील से संपर्क करने के लिए पर्याप्त सुविधा दी गई?

 

दिल्ली पुलिस का वीडियो सूचना दिए जाने और यात्रा संबंधी सहायता की पेशकश के उसके दावे को सामने रखता है। वहीं, दीपके का बयान फोन और वकील से संपर्क की अनुमति को लेकर अलग सवाल उठाता है। केवल वीडियो जारी होने या किसी पक्ष के बयान के आधार पर विवाद के सभी पहलुओं का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

 

इस मामले में हिरासत से जुड़े रिकॉर्ड, बातचीत का पूरा संदर्भ और संबंधित पक्षों के बयान महत्वपूर्ण हो सकते हैं। फिलहाल सार्वजनिक रूप से सामने आए दावों को आरोप और स्पष्टीकरण के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

 

निष्कर्ष

 

CJP नेता अभिजीत दीपके की दादी के निधन को लेकर आशुतोष रांका के आरोपों और दिल्ली पुलिस के स्पष्टीकरण ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। पुलिस ने वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखा है, जबकि दीपके ने परिवार और वकील से संपर्क नहीं करने देने के आरोप दोहराए हैं।

 

अब इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण सवाल यह है कि हिरासत के दौरान परिवार से संपर्क और अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए वास्तव में क्या व्यवस्था की गई थी। उपलब्ध तथ्यों, संबंधित वीडियो और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर ही इस विवाद की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

कानपुर विकास प्राधिकरण कार्यालय और कथित अनियमितताओं से जुड़ी खबर

कानपुर विकास प्राधिकरण में कथित अनियमितताओं पर उठे सवाल, बर्खास्त कर्मचारी राकेश रावत ने लगाए गंभीर आरोप कानपुर

कानपुर विकास प्राधिकरण में कथित वित्तीय अनियमितताओं और बर्खास्तगी को लेकर पूर्व कर्मचारी राकेश रावत ने सवाल उठाए हैं। मामले में निष्पक्ष जांच और आधिकारिक जवाब की मांग महत्वपूर्ण है।

कानपुर: डॉ. संजय काला की टीम का कमाल! हैलट में जटिल ऑपरेशन कर निकालीं 70 पथरियां

कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने जटिल ऑपरेशन कर 46 वर्षीय मरीज की मुख्य पित्त नली से करीब 70 पथरियां निकालीं। इससे पहले दो ओपन सर्जरी और चार ईआरसीपी प्रयास सफल नहीं हुए थे।

नरेंद्र शर्मा परवाना की भारतीय प्रेस परिषद की सदस्यता तक की प्रेरणादायक यात्रा और 64 वर्षों के जीवन अनुभव

नरेंद्र शर्मा परवाना के 64 वर्षों के अनुभव की कहानी

नरेंद्र शर्मा परवाना का 64 वर्षों का जीवन सफर संस्कार, सेना में सेवा, साहित्य साधना और पत्रकारिता के संघर्ष की प्रेरक कहानी है। भारतीय प्रेस परिषद की सदस्यता तक पहुंचने का उनका सफर मेहनत, अनुशासन और जिम्मेदारी का संदेश देता है।