कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) में कथित वित्तीय अनियमितताओं और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर मामला एक बार फिर चर्चा में है। प्राधिकरण के गेट पर लगाए गए होर्डिंग के जरिए बर्खास्त कर्मचारी एवं कर्मचारी नेता राकेश रावत ने कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
होर्डिंग में एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल से संबंधित 90,88,56,667 रुपये की धनराशि का उल्लेख करते हुए योजनाबद्ध तरीके से धनराशि छोड़े जाने और आपत्ति के बाद प्राधिकरण के कोष में जमा होने के संबंध में शिकायत किए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बिना इन्हें स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
राकेश रावत ने आरोप लगाया है कि मामले में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित होने के बावजूद जांच रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के संबंधित अधिकारियों से जवाबदेही तय करने और जांच की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है।
इस मामले में एक अन्य होर्डिंग के जरिए दि लॉयर्स एसोसिएशन कानपुर नगर अधिवक्ता संस्था के लेटर पैड के कथित दुरुपयोग को लेकर भी विरोध दर्ज कराए जाने का उल्लेख है। रावत का कहना है कि कथित अनियमितताओं और संबंधित अभिलेखों की निष्पक्ष पड़ताल कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

जांच और प्रशासन की प्रतिक्रिया पर नजर
मामले में अब KDA प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। संबंधित धनराशि, जांच समिति की रिपोर्ट, विभागीय पत्राचार और लगाए गए आरोपों से जुड़े दस्तावेजों की पुष्टि होने के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
राकेश रावत ने क्या कहा?
समाचार पत्र में प्रकाशित बयान के अनुसार, राकेश रावत ने दावा किया कि उनके खिलाफ हुई जांचों में उन्हें निर्दोष पाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों ने कथित रूप से कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उन्हें बर्खास्त करवाया। जिसमें तत्कालीन दि लॉयर्स एसोसिएशन कानपुर नगर के अध्यक्ष शैलेंद्र शुक्ला द्वारा स्वयं प्राधिकरण में उपस्थित होकर शपथ पत्र प्रदान कर स्पष्ट किया कि संस्था का पत्र फर्जी एवं उसमें उनके हस्ताक्षर फर्जी बनाए गए है जिससे रावत का कहना है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले जांच अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग भी की है।
फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और KDA प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। जांच से जुड़े दस्तावेज और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही प्रकरण की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
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