मुख्यमंत्री से मिलने लखनऊ रवाना धीरज चड्ढा, मठ मंदिर रक्षा समिति विवाद में शिकायत रखने की बात
कानपुर में मठ मंदिर रक्षा समिति से जुड़ा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। समिति से जुड़े धीरज चड्ढा अपनी शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने रखने के लिए लखनऊ रवाना हुए हैं। वह स्वरूप नगर स्थित अपने आवास से कार से लखनऊ के लिए निकले। इस दौरान उनके हाथ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पोस्टर भी दिखाई दिया।
धीरज चड्ढा का कहना है कि कथित धोखाधड़ी, लेन-देन और वसूली से जुड़े मामले में उन्होंने कानपुर पुलिस और संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत की थी। उनका आरोप है कि शिकायत के बावजूद उन्हें अपेक्षित कार्रवाई नहीं मिली। अब उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री से मिलकर पूरे मामले की जानकारी देने की बात कही है।
शिकायत लेकर मुख्यमंत्री से मिलने की बात
धीरज चड्ढा के मुताबिक, उन्होंने कथित धोखाधड़ी और लेन-देन से जुड़े मामले में पुलिस आयुक्त समेत संबंधित अधिकारियों को शिकायत दी थी। उनका कहना है कि मामले में जिन लोगों के खिलाफ उन्होंने शिकायत की है, उनके संबंध में उपलब्ध जानकारी और अपनी शिकायत को वह मुख्यमंत्री के सामने रखना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर शिकायत देने के बाद अब वह प्रदेश स्तर पर अपनी बात पहुंचाना चाहते हैं। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जिन लोगों के नाम शिकायत में बताए गए हैं, उनका पक्ष भी इस रिपोर्ट के समय उपलब्ध नहीं है।
कई लोगों पर लगाए आरोप
धीरज चड्ढा ने अपनी शिकायत के संदर्भ में अमित कुमार गुप्ता, आशीष शुक्ला उर्फ बिल्लू एडवोकेट, विनोद गुप्ता उर्फ बिन्नू, जितेंद्र वाजपेई उर्फ जीतू और नवनीत मिश्रा के नाम लिए हैं।
उनका आरोप है कि कथित धोखाधड़ी और लेन-देन से जुड़े मामले में इन लोगों की भूमिका को लेकर उन्होंने पुलिस अधिकारियों को जानकारी दी है। धीरज चड्ढा का कहना है कि वह चाहते हैं कि पूरे मामले की जांच कर तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाए।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये आरोप धीरज चड्ढा की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है। संबंधित लोगों की प्रतिक्रिया सामने आने पर मामले की दूसरी पक्ष की स्थिति भी स्पष्ट हो सकेगी।
मठ मंदिर रक्षा समिति को लेकर भी विवाद
धीरज चड्ढा का मुख्यमंत्री से मिलने का कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब मठ मंदिर रक्षा समिति के भीतर उनके पद को लेकर भी विवाद चल रहा है।
समिति के जिलाध्यक्ष उमेश तिवारी ने 28 सितंबर को धीरज चड्ढा को महामंत्री पद से हटाए जाने की बात कही थी। इस दावे के बाद समिति के भीतर पद और संगठनात्मक अधिकारों को लेकर सवाल उठे।
वहीं धीरज चड्ढा ने इस कार्रवाई को स्वीकार नहीं किया है। उनका कहना है कि उन्हें प्रदेश स्तर से महामंत्री पद से हटाए जाने का कोई लिखित आदेश नहीं मिला है। इसी आधार पर वह खुद को अभी भी पद पर होने का दावा कर रहे हैं।
दोनों पक्षों के दावों में अंतर
मठ मंदिर रक्षा समिति से जुड़े इस विवाद में फिलहाल दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। एक तरफ जिलाध्यक्ष उमेश तिवारी की ओर से धीरज चड्ढा को पद से हटाए जाने की बात कही गई है, जबकि धीरज चड्ढा का कहना है कि उनके पास पद से हटाए जाने संबंधी कोई लिखित प्रदेश स्तरीय आदेश नहीं है।
ऐसे में संगठन के भीतर पद को लेकर वास्तविक स्थिति किसी आधिकारिक दस्तावेज या समिति के सक्षम स्तर से जारी आदेश के आधार पर ही स्पष्ट हो सकती है।
पुलिस कार्रवाई पर धीरज चड्ढा ने उठाए सवाल
धीरज चड्ढा का कहना है कि कथित धोखाधड़ी और वसूली के मामले को लेकर उन्होंने पहले ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया था। उनका आरोप है कि उन्हें अपेक्षित कार्रवाई नहीं मिली।
अब वह मुख्यमंत्री के सामने अपनी शिकायत रखने की बात कह रहे हैं। उनका कहना है कि वह पूरे मामले की जानकारी मुख्यमंत्री को देकर कार्रवाई की मांग करेंगे।
हालांकि, किसी शिकायत में नाम आने मात्र से आरोप साबित नहीं होते। मामले में पुलिस जांच, दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर ही तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
मुख्यमंत्री के सामने क्या रखेंगे शिकायत
लखनऊ रवाना होने से पहले धीरज चड्ढा ने संकेत दिया कि वह मुख्यमंत्री के सामने अपने द्वारा की गई शिकायतों और अब तक हुई कार्रवाई की स्थिति को रखेंगे। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर जिन अधिकारियों के सामने उन्होंने मामला उठाया, वहां से उन्हें जिस तरह की कार्रवाई की उम्मीद थी, वह नहीं हुई।
उनकी कोशिश अब मामले को मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचाने की है। हालांकि मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात होती है या नहीं और शिकायत पर किस स्तर पर कार्रवाई होती है, यह आगे स्पष्ट होगा।
आगे की रणनीति पर भी संकेत
धीरज चड्ढा ने कहा है कि अगर उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं होती है तो वह आगे भी इस मामले को लेकर कदम उठाएंगे। उन्होंने मामले को लेकर अपनी शिकायत और आरोपों को सार्वजनिक रूप से सामने रखा है।
दूसरी ओर, जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, उनका पक्ष सामने आना भी जरूरी होगा, ताकि पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सके। फिलहाल आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस या प्रशासन की ओर से मामले में अंतिम निष्कर्ष की जानकारी सामने नहीं आई है।
प्रशासन की कार्रवाई पर रहेगी नजर
धीरज चड्ढा के लखनऊ रवाना होने के बाद अब इस पूरे मामले में प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर रहेगी। एक तरफ कथित धोखाधड़ी और लेन-देन से जुड़े आरोप हैं, वहीं दूसरी ओर मठ मंदिर रक्षा समिति के महामंत्री पद को लेकर संगठनात्मक विवाद भी जारी है।
मुख्यमंत्री के सामने शिकायत रखने की धीरज चड्ढा की कोशिश के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग मामले की जांच को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं। यदि जांच शुरू होती है तो दस्तावेज, शिकायतें और सभी संबंधित पक्षों के बयान मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाने में अहम हो सकते हैं।
फिलहाल धीरज चड्ढा लखनऊ के लिए रवाना हो चुके हैं और उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात रखने की बात कही है। अब उनकी शिकायत पर सरकार और प्रशासन की ओर से होने वाली कार्रवाई का इंतजार है।















