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MPSC में बिक रहीं नौकरियां, सड़कों पर युवा: उद्धव गुट ने चेताया- छात्रों का गुस्सा सरकार को डुबो देगा

मुंबई. महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) से जुड़े विवाद को लेकर महाराष्ट्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए, शिवसेना (यूबीटी) ने बुधवार को राज्य नेतृत्व को प्रतियोगी परीक्षा के उम्मीदवारों के बीच बढ़ते आक्रोश को नजरअंदाज न करने की चेतावनी दी और कहा कि अगर छात्रों के असंतोष को अनियंत्रित छोड़ दिया गया तो इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं.

ठाकरे खेमे ने पार्टी के मुखपत्र सामना के संपादकीय में पुणे, कोल्हापुर, छत्रपति संभागीनगर और अमरावती सहित प्रमुख शहरों में हजारों प्रतियोगी परीक्षा उम्मीदवारों के सड़कों पर उतरने का जिक्र किया, जो एमपीएससी के भ्रष्ट नेतृत्व को तत्काल हटाने, डेटा लीक की पूरी और निष्पक्ष जांच और प्रतियोगी परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता लागू करने की मांग कर रहे थे.

संपादकीय में आयोग के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार की कड़ी आलोचना की गई और एमपीएससी ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के दौरान हुए लीक का जिक्र किया गया. इसमें आरोप लगाया गया कि सरकारी पदों की लाखों रुपये में नीलामी की जा रही है, जिससे मेहनती और ईमानदार उम्मीदवारों के सपने चकनाचूर हो रहे हैं. पुलिस की कार्रवाई की आलोचना करते हुए ठाकरे खेमे ने कहा कि जहां छोटे-मोटे अपराधियों को पकड़ा जा रहा है, वहीं इस रैकेट के मास्टरमाइंड, सरगना और राजनीतिक रूप से जुड़े संरक्षक सरकारी संरक्षण में खुलेआम घूम रहे हैं.

सामना के संपादकीय में कहा गया कि परीक्षा पत्रों को लाखों रुपये में बेचना सरकारी नौकरी पाने की आकांक्षा रखने वाले मेहनती छात्रों के सपनों को चकनाचूर कर देता है. हालांकि छोटे-मोटे अपराधियों को निशाना बनाया गया है, लेकिन छात्र इस बात से नाराज हैं कि पेपर लीक सिंडिकेट के प्रमुख सूत्रधार और उच्च स्तरीय समर्थक अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं.

राजनीतिक अस्थिरता और संस्थागत पतन के बीच स्पष्ट तुलना करते हुए संपादकीय में कहा गया कि आयोग में बैठे लोग परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक करते हैं, जबकि सरकार में बैठे लोग राजनीतिक दलों, विधायकों और पार्षदों को लीक करते हैं. दोनों का धंधा एक ही है. पुणे में प्रदर्शनकारियों ने भी इसी भावना को व्यक्त करते हुए पोस्टरों पर पूछा कि क्या आप विधायकों को तोड़ने के लिए ही सत्ता में बैठे हैं?

पिछले एक दशक में राज्य के राजनीतिक परिदृश्य पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के व्यापक प्रभाव की ओर इशारा करते हुए, संपादकीय में शीर्ष नेतृत्व को उन कागजी सूचनाओं के लीक को रोकने में विफल रहने के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया है, जो युवा करियर को बर्बाद करना जारी रखे हुए हैं.

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने आंदोलनकारी छात्रों की अनदेखी करने और ठेकेदारों से बातचीत करने के लिए वातानुकूलित कार्यालयों में दुबके रहने के लिए राज्य मंत्रियों की निंदा की. संपादकीय में शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के शिवशाही युग के शासन मॉडल को याद किया गया, जिसमें मंत्रियों को सख्ती से निर्देश दिए गए थे कि वे बाहर निकलें, प्रदर्शनकारियों से आमने-सामने मिलें और जनता की शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करें. इसके विपरीत, वर्तमान प्रशासन को एक निष्क्रिय, संवादहीन इकाई के रूप में वर्णित किया गया, जो युवाओं की चिंताओं से पूरी तरह से अलग है.

ठाकरे खेमे ने पेपर लीक घोटाले में शामिल सभी दोषियों और साजिशकर्ताओं की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की. उन्होंने कहा, “विभाजन और दलबदल से बनी सरकार लीक के अलावा कुछ नहीं दे सकती. आग से मत खेलो. अगर छात्रों का बढ़ता गुस्सा बेकाबू हो गया, तो यह खोखली सरकार पूरी तरह राख हो जाएगी.”

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