हमीरपुर के मॉडल स्कूल इमिलिया में सरकारी किताब-कॉपियां बाहर ले जाने का आरोप, वीडियो वायरल; जांच के आदेश
मॉडल स्कूल इमिलिया से सरकारी सामग्री बाहर ले जाने का मामला
हमीरपुर जिले के मुस्करा विकासखंड स्थित मॉडल स्कूल इमिलिया से सरकारी किताब-कॉपियां और अन्य सामग्री बाहर ले जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि स्कूल में उपलब्ध सरकारी सामग्री को ई-रिक्शा के जरिए बाहर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान कुछ ग्रामीणों ने ई-रिक्शा को रोककर उसका वीडियो बना लिया।
वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आया। ग्रामीणों की ओर से दावा किया जा रहा है कि ई-रिक्शा में सरकारी किताबें और कॉपियां मौजूद थीं। वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों तक मामला पहुंचा, जिसके बाद जांच के निर्देश दिए गए हैं।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि स्कूल से सामग्री किस उद्देश्य से बाहर ले जाई जा रही थी और क्या वास्तव में सरकारी किताब-कॉपियों को बेचने का प्रयास किया जा रहा था। इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
ग्रामीणों ने ई-रिक्शा रोककर बनाया वीडियो
बताया जा रहा है कि स्कूल से सामग्री लेकर एक ई-रिक्शा बाहर जा रहा था। इसी दौरान ग्रामीणों की नजर उस पर पड़ी। ग्रामीणों ने ई-रिक्शा को रोक लिया और उसमें रखी सामग्री का वीडियो रिकॉर्ड किया।
वीडियो में किताब-कॉपियां और अन्य सामान दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। ग्रामीणों ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद मामला तेजी से फैल गया।
ग्रामीणों के बीच इस बात को लेकर सवाल उठने लगे कि आखिर सरकारी स्कूल में इस्तेमाल होने वाली किताब-कॉपियां और दूसरी सामग्री स्कूल परिसर से बाहर किस अनुमति के तहत ले जाई जा रही थी।
हालांकि, वीडियो सामने आने के बावजूद सामग्री की वास्तविक स्थिति, उसका रिकॉर्ड और उसे बाहर ले जाने की अनुमति से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी अभी जांच का विषय है।
सरकारी किताबें बेचने के आरोप से मचा हड़कंप
मामले में ग्रामीणों की ओर से सरकारी किताब-कॉपियां बेचने का आरोप लगाया गया है। यह आरोप सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में भी हलचल मच गई।
सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली किताबें और अन्य शैक्षणिक सामग्री निर्धारित प्रक्रिया के तहत वितरित या इस्तेमाल की जाती हैं। ऐसे में यदि किसी सरकारी सामग्री को बिना अनुमति बाहर ले जाने की पुष्टि होती है, तो मामला गंभीर हो सकता है।
हालांकि, अभी तक किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया गया है। शिक्षा विभाग की जांच में यह देखा जाएगा कि ई-रिक्शा में ले जाई जा रही सामग्री वास्तव में सरकारी थी या नहीं, उसे स्कूल से बाहर ले जाने की अनुमति थी या नहीं और यदि सामग्री सरकारी थी तो उसे बाहर भेजने का उद्देश्य क्या था।
मामला अधिकारियों के संज्ञान में पहुंचा
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद मामला शिक्षा विभाग के अधिकारियों के संज्ञान में पहुंचा। इसके बाद DIOS हमीरपुर की ओर से मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों की जांच में स्कूल के रिकॉर्ड, उपलब्ध किताब-कॉपियों की संख्या और बाहर ले जाई गई सामग्री का मिलान किया जा सकता है। इसके साथ ही स्कूल से जुड़े कर्मचारियों और संबंधित लोगों से भी जानकारी ली जा सकती है।
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि घटना के पीछे वास्तविक वजह क्या थी और क्या नियमों का उल्लंघन हुआ है।
कबाड़ी वाले से भी जानकारी लेने की बात
मामले से जुड़े वीडियो और उपलब्ध जानकारी के आधार पर कबाड़ी वाले का पक्ष भी सामने आने की बात कही गई है। यदि सरकारी सामग्री को कबाड़ में बेचने या भेजने का आरोप सही पाया जाता है, तो यह जांच का अहम हिस्सा होगा कि सामग्री किसके माध्यम से और किस उद्देश्य से वहां पहुंची।
कबाड़ी से यह जानकारी भी ली जा सकती है कि ई-रिक्शा में लाई गई सामग्री किसने भेजी थी और उसके बदले कोई लेन-देन हुआ था या नहीं।
इन तमाम सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेंगे।
DIOS ने दिए जांच के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए DIOS हमीरपुर ने जांच कराने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों की ओर से कहा गया है कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है।
DIOS के मुताबिक, यदि जांच में कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसका मतलब है कि फिलहाल विभाग आरोपों की पुष्टि के लिए तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल कर रहा है।
जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सरकारी किताब-कॉपियां किस वजह से स्कूल से बाहर ले जाई जा रही थीं और इस पूरी प्रक्रिया में किसी नियम का उल्लंघन हुआ या नहीं।
सरकारी स्कूल की व्यवस्था पर उठे सवाल
इस मामले ने सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली सामग्री के रखरखाव और वितरण व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। सरकारी किताबें और कॉपियां विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए उपलब्ध कराई जाती हैं, इसलिए इनके रिकॉर्ड और उपयोग की निगरानी महत्वपूर्ण होती है।
यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है, तो विभागीय स्तर पर जिम्मेदारी तय की जा सकती है। वहीं, यदि सामग्री को बाहर ले जाने की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप पाई जाती है, तो वायरल वीडियो के आधार पर लगाए गए आरोपों की स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल मॉडल स्कूल इमिलिया से जुड़ा पूरा मामला जांच के दायरे में है। ग्रामीणों द्वारा बनाए गए वीडियो के वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले को संज्ञान में लिया है और जांच शुरू कराई जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी किताब-कॉपियां और अन्य सामग्री स्कूल से बाहर क्यों ले जाई जा रही थी। क्या यह सामग्री वास्तव में सरकारी थी? क्या उसे बाहर ले जाने की अनुमति थी? क्या इसे कबाड़ में बेचने का प्रयास किया जा रहा था या इसके पीछे कोई प्रशासनिक कारण था?
इन सभी सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिलेगा।
फिलहाल शिक्षा विभाग की जांच पर सभी की नजर है। विभाग की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह तय होगा कि मामले में कोई अनियमितता हुई है या वायरल वीडियो के आधार पर लगाए गए आरोपों की वास्तविकता कुछ और है।
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बाइट: DIOS हमीरपुर















