ग्रेटर नोएडा में चलती स्लीपर बस में लगी आग, 9 यात्रियों की मौत; चालक-परिचालक हिरासत में
ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार देर रात एक स्लीपर बस में लगी आग ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। जेवर थाना क्षेत्र में चलती बस अचानक आग की चपेट में आ गई। देखते ही देखते लपटें इतनी तेज हो गईं कि यात्रियों को अपनी जान बचाने के लिए अफरातफरी के बीच बस से बाहर निकलना पड़ा। हादसे में नौ यात्रियों की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाले जाने की जानकारी सामने आई है।
घटना यमुना एक्सप्रेसवे पर 33वें किलोमीटर के आसपास हुई। अधिकारियों के मुताबिक बस दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा की ओर जा रही थी। हादसा बुधवार और गुरुवार की दरम्यानी रात करीब 11 बजे के बाद हुआ। आग लगने के समय बस में बड़ी संख्या में यात्री मौजूद थे और बताया गया कि कई लोग सो रहे थे।
कुछ ही देर में पूरी बस आग की चपेट में
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बस में आग लगने के बाद यात्रियों को संभलने का ज्यादा समय नहीं मिला। धुआं तेजी से बस के भीतर भरने लगा और इसके बाद यात्रियों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। कुछ लोगों ने खिड़कियों के रास्ते बाहर निकलकर अपनी जान बचाई।
फायर विभाग और पुलिस को सूचना मिलते ही राहत दल मौके पर पहुंचा। आसपास उपलब्ध दमकल संसाधनों के साथ अतिरिक्त फायर टेंडर भी घटनास्थल पर भेजे गए। राहतकर्मियों ने आग पर काबू पाने के बाद बस के अंदर तलाशी अभियान चलाया। इसी दौरान नौ यात्रियों के शव बरामद हुए। अधिकारियों के मुताबिक मृतकों की मौत आग से झुलसने या दम घुटने के कारण हुई।
20 से ज्यादा यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया
हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान तेजी से चलाया गया। पुलिस और फायर टीमों ने बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकाला। अधिकारियों ने 20 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित बचाए जाने की जानकारी दी है। कुछ रिपोर्टों में बचाए गए यात्रियों की संख्या 20 से 25 के बीच बताई गई है।
घटना के बाद एक्सप्रेसवे पर कुछ समय के लिए अफरातफरी का माहौल रहा। पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए राहत कार्य जारी रखा। हादसे में जान गंवाने वाले यात्रियों की पहचान की प्रक्रिया भी शुरू की गई।
आग की वजह को लेकर जांच जारी
बस में आग आखिर किस वजह से लगी, इसका अंतिम कारण अभी जांच का विषय है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी के मुताबिक शुरुआती जांच में बस के एयर कंडीशनिंग सिस्टम में स्पार्क या खराबी की संभावना सामने आई है। इसके बाद आग तेजी से फैलने की आशंका जताई गई है। हालांकि अधिकारियों ने साफ किया है कि आग का वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
पुलिस घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। बस की तकनीकी स्थिति, आग लगने की परिस्थितियों और यात्रियों के बयानों को भी जांच में शामिल किया जा रहा है।
चालक और परिचालक गिरफ्तार
हादसे के बाद पुलिस ने बस के चालक और परिचालक को गिरफ्तार किया है। उनके खिलाफ मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि आग लगने से पहले बस में किसी तरह की तकनीकी समस्या सामने आई थी या नहीं और अगर कोई समस्या थी तो उस पर क्या कार्रवाई की गई।
FIR से जुड़ी रिपोर्टों में कुछ यात्रियों की ओर से यह आरोप भी सामने आया है कि आग फैलने से पहले बस के चालक केबिन की तरफ से जलने जैसी गंध महसूस हुई थी और इसकी जानकारी चालक-परिचालक को दी गई थी। यह आरोप जांच का हिस्सा हैं और इनके संबंध में पुलिस की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
हादसे के बाद सामने आया खौफनाक मंजर
बस में मौजूद यात्रियों के लिए यह घटना बेहद अचानक हुई। रात का समय होने और कई यात्रियों के सोने की वजह से शुरुआती क्षणों में लोगों को स्थिति समझने में मुश्किल हुई। आग और धुएं के बीच यात्रियों ने किसी तरह बस से बाहर निकलने की कोशिश की।
कुछ यात्रियों के सुरक्षित बाहर आने के बाद भी बस के अंदर फंसे लोगों को निकालना राहत दल के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। आग बुझने के बाद जब बचावकर्मी बस के अंदर पहुंचे, तब वहां नौ यात्रियों के शव मिले।
मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना
हादसे की जानकारी सामने आने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी घटना पर दुख जताते हुए अधिकारियों को आवश्यक राहत और उपचार व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। राज्य सरकार की ओर से मृतकों के परिवारों के लिए दो-दो लाख रुपये और घायलों के लिए 50-50 हजार रुपये की सहायता की घोषणा किए जाने की जानकारी सामने आई है।
हादसे ने फिर खड़े किए सुरक्षा से जुड़े सवाल
यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए इस हादसे ने लंबी दूरी की स्लीपर बसों में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। खासकर रात में चलने वाली बसों में आपात स्थिति से निपटने की व्यवस्था, अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास और वाहन की तकनीकी जांच जैसे पहलू महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
हालांकि इस हादसे में आग की अंतिम वजह अभी सामने नहीं आई है, लेकिन जांच के दौरान बस की तकनीकी स्थिति और सुरक्षा मानकों की भी पड़ताल की जा सकती है।
फिलहाल पुलिस और प्रशासन की प्राथमिकता मृतकों की पहचान, परिजनों तक सूचना पहुंचाने और घटना की विस्तृत जांच करना है। चालक और परिचालक से पूछताछ के साथ-साथ बस की तकनीकी जांच भी हादसे की वजह सामने लाने में अहम हो सकती है।
ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे पर हुआ यह बस अग्निकांड नौ परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति छोड़ गया है। हादसे की वास्तविक वजह और इसमें किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं, इसका पता पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।















