कौशांबी में AI वीडियो पर विवाद
कौशांबी में अखिलेश-इंद्रजीत सरोज की कथित AI वीडियो पर बवाल, FIR की मांग
कौशांबी में सोशल मीडिया पर वायरल बताई जा रही एक कथित AI वीडियो को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आया है। वीडियो को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव इंद्रजीत सरोज से जोड़कर देखा जा रहा है। समाजवादी पार्टी के नेताओं और अधिवक्ताओं ने वीडियो की सामग्री पर आपत्ति जताते हुए इसे कथित तौर पर अभद्र और भ्रामक बताया है।
मामले को लेकर सपा अधिवक्ता सभा के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह के नेतृत्व में अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल मंझनपुर कलेक्ट्रेट पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर वायरल वीडियो की तकनीकी जांच कराने और जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज कर कार्रवाई की मांग की।
हालांकि, वीडियो वास्तव में AI तकनीक से बनाया गया है या नहीं, इसे किसने तैयार किया और इसे किस उद्देश्य से सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
सोशल मीडिया पर सामने आई कथित AI वीडियो
सपा नेताओं के मुताबिक फेसबुक पर एक वीडियो साझा किया गया, जिसे कथित तौर पर AI तकनीक की मदद से तैयार किया गया है। नेताओं का आरोप है कि वीडियो में अखिलेश यादव और इंद्रजीत सरोज से संबंधित आपत्तिजनक और भ्रामक बातें दिखाई गई हैं।
सपा अधिवक्ता सभा की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि वीडियो में जाति से जुड़ी ऐसी सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिससे सामाजिक माहौल प्रभावित हो सकता है। पार्टी नेताओं ने इस तरह की सामग्री के तेजी से प्रसारित होने को लेकर चिंता जताई है।
वीडियो में किए गए दावों और उसकी तकनीकी प्रकृति की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए मामले में अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
अजीत सिंह के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पहुंचे अधिवक्ता
कथित वीडियो को लेकर सपा अधिवक्ता सभा के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह के नेतृत्व में कई अधिवक्ता मंझनपुर कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां उन्होंने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की।
ज्ञापन में कथित फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट भी साक्ष्य के तौर पर लगाए जाने की बात कही गई है। अधिवक्ताओं ने प्रशासन से मांग की कि सोशल मीडिया पोस्ट के मूल स्रोत की पहचान की जाए और वीडियो के निर्माण से लेकर उसके प्रसार तक की गतिविधियों की जांच की जाए।
‘बीरेंद्र सरोज फौजी’ नाम के अकाउंट पर आरोप
सपा अधिवक्ता सभा की ओर से दावा किया गया कि कथित वीडियो ‘बीरेंद्र सरोज फौजी’ नाम के फेसबुक यूजर की प्रोफाइल से साझा किया गया। संगठन ने संबंधित अकाउंट की भी जांच कराने की मांग की है।
हालांकि किसी सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट साझा होने मात्र से यह साबित नहीं होता कि वीडियो उसी व्यक्ति ने तैयार किया है। वीडियो बनाने, एडिट करने, अपलोड करने और उसे आगे प्रसारित करने में अलग-अलग लोगों की भूमिका हो सकती है। इसी वजह से अधिवक्ताओं ने तकनीकी जांच पर जोर दिया है।
वीडियो की तकनीकी जांच की मांग
सपा नेताओं ने प्रशासन से वीडियो की डिजिटल और तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच के जरिए यह पता लगाया जाना चाहिए कि वीडियो वास्तविक रिकॉर्डिंग है या इसमें डिजिटल तरीके से बदलाव किया गया है।
इसके साथ ही यह भी पता लगाने की मांग की गई है कि वीडियो तैयार करने के लिए किसी AI टूल का इस्तेमाल हुआ या नहीं। डिजिटल जांच में उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर वीडियो के स्रोत और उसके प्रसार की कड़ी को समझने में मदद मिल सकती है।
भ्रामक डिजिटल सामग्री को लेकर जताई चिंता
सपा नेताओं ने कहा कि सोशल मीडिया पर AI की मदद से तैयार की गई सामग्री तेजी से लोगों तक पहुंच सकती है। यदि किसी वास्तविक व्यक्ति के चेहरे, आवाज या बयान को बदलकर प्रस्तुत किया जाता है तो आम लोगों के लिए असली और कृत्रिम सामग्री में अंतर करना मुश्किल हो सकता है।
इसी को लेकर अधिवक्ताओं ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेने की अपील की। उनका कहना है कि यदि जांच में वीडियो जानबूझकर भ्रामक तरीके से तैयार और प्रसारित किए जाने की बात सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
FIR दर्ज कराने की मांग
ज्ञापन के माध्यम से सपा अधिवक्ता सभा ने संबंधित फेसबुक यूजर के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की। अधिवक्ताओं का कहना है कि पहले वीडियो की तकनीकी जांच कराई जाए और इसके बाद जिम्मेदार व्यक्ति या व्यक्तियों की भूमिका तय की जाए।
सपा नेताओं ने प्रशासन से यह भी मांग की कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूद संबंधित पोस्ट और डिजिटल सामग्री को जांच का हिस्सा बनाया जाए, ताकि मामले में उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जा सके।
सपा महिला सभा की जिलाध्यक्ष भी रहीं मौजूद
कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपने के दौरान सपा महिला सभा की जिलाध्यक्ष विभा यादव समेत कई अधिवक्ता और पार्टी से जुड़े लोग मौजूद रहे।
कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से जल्द जांच पूरी कर मामले में आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की। नेताओं का कहना है कि सोशल मीडिया पर किसी भी राजनीतिक व्यक्ति को लेकर गलत या आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित किए जाने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूरी है।
जांच के बाद सामने आएगी वीडियो की सच्चाई
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल वायरल वीडियो की वास्तविकता को लेकर है। सपा नेताओं ने इसे कथित AI-generated वीडियो बताते हुए कार्रवाई की मांग की है, लेकिन इसकी तकनीकी पुष्टि अभी बाकी है।
प्रशासनिक और डिजिटल जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वीडियो किसने तैयार किया, इसमें किस तकनीक का इस्तेमाल हुआ और इसे सोशल मीडिया पर किस उद्देश्य से प्रसारित किया गया।
यदि जांच के दौरान किसी व्यक्ति की भूमिका और किसी कानूनी उल्लंघन के पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल मामला सपा अधिवक्ता सभा की शिकायत और प्रशासन से की गई जांच व FIR की मांग तक सीमित है।















