कानपुर। पैतृक कृषि भूमि को लेकर चल रहे विवाद में दो बुजुर्ग भाइयों ने विरोधी पक्ष पर उत्पीड़न, खेती करने से रोकने, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं। पीड़ितों ने मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित कराने की मांग की है। शनिवार को नवीन मार्केट स्थित कानपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान दोनों भाइयों ने अपनी परेशानी सामने रखी।
गोविंद नगर निवासी सतीश चंद्र दीक्षित (73) और उनके छोटे भाई कुलदीप दीक्षित (71) के मुताबिक, पुरवामीर और सिकठिया गांव में उनकी पैतृक कृषि भूमि है। दोनों भाइयों का आरोप है कि जून 2014 में राजस्व कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से उनके पिता और रिश्तेदारों के नाम राजस्व अभिलेखों से हटाकर दूसरे लोगों के नाम दर्ज करा दिए गए।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि इस मामले को लेकर चकबंदी न्यायालय समेत विभिन्न राजस्व न्यायालयों में कानूनी कार्यवाही चलती रही है। उनका दावा है कि जमीन से जुड़े विवाद के कारण उन्हें लंबे समय से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रेस वार्ता में दोनों भाइयों ने पुरवामीर स्थित कृषि भूमि की वरासत से संबंधित न्यायिक कार्यवाही का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, तहसीलदार न्यायालय ने 15 अक्टूबर 2023 और 6 फरवरी 2024 को आदेश पारित किए थे।
पीड़ितों के मुताबिक, दूसरे पक्ष ने इन आदेशों को चुनौती देने के लिए पुनर्स्थापन प्रार्थना पत्र दाखिल किया था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। इसके बाद मामला आयुक्त और उपजिलाधिकारी न्यायालय तक पहुंचा।
दोनों भाइयों का दावा है कि 21 अप्रैल 2026 को उपजिलाधिकारी नर्वल ने दूसरे पक्ष की अपील खारिज कर दी थी। उन्होंने यह भी बताया कि 16 जुलाई 2026 को जारी स्थगन आदेश और निगरानी को अतिरिक्त आयुक्त न्यायालय ने 9 अक्टूबर 2026 को निरस्त कर दिया।
इन आदेशों और राजस्व अभिलेखों से संबंधित दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकी है।
सतीश चंद्र दीक्षित और कुलदीप दीक्षित का आरोप है कि पिछले करीब पांच वर्षों से उन्हें अपनी पैतृक जमीन पर शांतिपूर्वक खेती नहीं करने दी जा रही है। उनका कहना है कि जब वे जमीन पर खेती करने का प्रयास करते हैं, तो विरोधी पक्ष की ओर से कथित तौर पर गाली-गलौज और विवाद किया जाता है।
दोनों भाइयों ने मुकदमे वापस लेने के लिए दबाव बनाए जाने और जान से मारने की धमकी मिलने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इस संबंध में जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त और स्थानीय पुलिस अधिकारियों को कई बार प्रार्थना पत्र दिए गए, लेकिन वे अब भी न्याय और सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
हालांकि, इन आरोपों पर दूसरे पक्ष का बयान और संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। इसलिए मामले के सभी पहलुओं की पुष्टि जांच और संबंधित अभिलेखों के आधार पर ही हो सकेगी।
पीड़ित पक्ष ने बताया कि संबंधित लोगों के विरुद्ध धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़े आरोपों का एक मुकदमा अपर सिविल जज, जूनियर डिवीजन-द्वितीय, कानपुर नगर के न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने वर्ष 2025 में दर्ज एक अन्य मुकदमे का भी जिक्र किया।
इन मामलों में आरोपों का अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल, दोनों भाइयों का कहना है कि वे अपनी पैतृक जमीन से जुड़े विवाद का कानूनी समाधान चाहते हैं।
प्रेस क्लब में अपनी बात रखते हुए दोनों बुजुर्ग भाइयों ने मुख्यमंत्री से पूरे प्रकरण में नियमानुसार कार्रवाई कराने की अपील की। उन्होंने पैतृक जमीन से जुड़े विवाद का समाधान कराने और परिवार की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
दोनों भाइयों का कहना है कि वे वरिष्ठ नागरिक हैं और चाहते हैं कि उनकी जमीन से जुड़े विवाद का निष्पक्ष निस्तारण हो, ताकि वे अपने जीवन के शेष वर्ष बिना भय और तनाव के बिता सकें।
कानपुर का यह मामला पैतृक कृषि भूमि, राजस्व अभिलेखों और लंबे समय से चल रही कानूनी कार्यवाही से जुड़ा है। दो बुजुर्ग भाइयों ने उत्पीड़न और धमकी के आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाई है। अब मामले में संबंधित प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की प्रतिक्रिया तथा उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा।















