हमीरपुर में हिंदुस्तान यूनिलीवर फैक्ट्री पर किसानों के आरोप, जहरीले पानी से खेती प्रभावित होने का दावा
हमीरपुर के सुमेरपुर औद्योगिक क्षेत्र में संचालित हिंदुस्तान यूनिलीवर फैक्ट्री को लेकर किसानों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि फैक्ट्री से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी के खेतों तक पहुंचने से लंबे समय से उनकी कृषि भूमि प्रभावित हो रही है। किसानों का दावा है कि कई वर्षों से इस समस्या के चलते सैकड़ों बीघा जमीन की उर्वरता पर असर पड़ा है और कुछ खेत बंजर होने की स्थिति में पहुंच गए हैं।
मामला अब खेतों के सामने से नाला बनाए जाने की चर्चा के बाद और गंभीर हो गया है। किसानों का आरोप है कि फैक्ट्री से पानी की निकासी के लिए राजस्व और यूपीसीडा के अभिलेखों में संबंधित स्थान पर कोई नाला दर्ज नहीं है। इसके बावजूद फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से किसानों के खेतों की तरफ से नाला बनाए जाने की तैयारी की जा रही है। किसानों का कहना है कि यदि ऐसा हुआ तो पहले से प्रभावित कृषि भूमि पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
हालांकि, फैक्ट्री प्रबंधन या संबंधित विभाग की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक पक्ष इस इनपुट में उपलब्ध नहीं है। इसलिए किसानों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
वर्षों से पानी को लेकर किसानों की शिकायत
सुमेरपुर में औद्योगिक गतिविधियों के बीच खेती करने वाले किसानों का आरोप है कि फैक्ट्री से निकलने वाला पानी उनकी जमीन तक पहुंचता रहा है। किसानों के मुताबिक इस पानी में रासायनिक तत्व होने की वजह से खेतों की मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हुई है।
किसानों का दावा है कि लगातार पानी पहुंचने के कारण कुछ कृषि भूमि की उत्पादकता कम हुई और कई स्थानों पर खेती करना मुश्किल हो गया। उनका कहना है कि जमीन उनके परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है, ऐसे में कृषि भूमि के प्रभावित होने से आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
किसानों की मांग है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि फैक्ट्री से निकलने वाले पानी की वास्तविक गुणवत्ता क्या है और उसका आसपास की कृषि भूमि पर कोई प्रभाव पड़ रहा है या नहीं।
नाला निर्माण को लेकर बढ़ा विवाद
किसानों के विरोध का एक प्रमुख कारण अब प्रस्तावित नाला बताया जा रहा है। किसानों के मुताबिक फैक्ट्री के पानी की निकासी के लिए उनके खेतों की दिशा में नाला बनाए जाने की तैयारी की जा रही है।
किसानों का कहना है कि यदि खेतों के सामने से नाला बनाया जाता है तो पहले से खेती को लेकर बनी समस्या और बढ़ सकती है। उनका आरोप है कि जिन जमीनों पर अभी भी खेती संभव है, वहां नाले के निर्माण से जल निकासी और भूमि उपयोग से जुड़ी नई समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि किसी भी निर्माण से पहले राजस्व रिकॉर्ड, भूमि की स्थिति और संबंधित विभागों के अभिलेखों की जांच की जाए।
अभिलेखों को लेकर किसानों ने उठाए सवाल
किसानों का कहना है कि फैक्ट्री से पानी निकासी के लिए जिस नाले की बात की जा रही है, उसका उल्लेख राजस्व और यूपीसीडा के अभिलेखों में नहीं है। किसानों के इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
उनका कहना है कि यदि नाला किसी सरकारी या अधिकृत योजना का हिस्सा है तो संबंधित विभाग को उसका नक्शा, स्वीकृति और भूमि संबंधी रिकॉर्ड स्पष्ट करना चाहिए। किसान यह भी चाहते हैं कि प्रस्तावित निर्माण से प्रभावित होने वाली जमीनों का सर्वे कराया जाए।
इस पूरे मामले में प्रशासनिक स्तर पर दस्तावेजों की जांच और मौके के निरीक्षण के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
स्वास्थ्य पर भी किसानों ने जताई चिंता
किसानों ने सिर्फ खेती ही नहीं, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता जताई है। उनका आरोप है कि फैक्ट्री से केमिकल उड़ने या फैलने की वजह से आसपास के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि, स्वास्थ्य पर किसी विशेष रसायन के प्रभाव या प्रदूषण की मात्रा को लेकर कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट इस मामले में सामने नहीं आई है। ऐसे में किसानों की इन आशंकाओं की पुष्टि के लिए पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी परीक्षण जरूरी होंगे।
किसानों का कहना है कि यदि फैक्ट्री के आसपास प्रदूषण संबंधी कोई समस्या है तो संबंधित विभागों को नियमित निगरानी और जांच करनी चाहिए।
हाईवे किनारे भारी वाहनों से भी परेशानी
किसानों ने फैक्ट्री के बाहर हाईवे के दोनों तरफ खड़े रहने वाले भारी वाहनों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सड़क किनारे भारी वाहनों के खड़े रहने से यातायात प्रभावित होता है और हादसों का खतरा बढ़ता है।
औद्योगिक क्षेत्र में माल ढुलाई के लिए भारी वाहनों की आवाजाही सामान्य है, लेकिन किसानों का कहना है कि यदि वाहन निर्धारित पार्किंग या सुरक्षित स्थानों पर खड़े हों तो सड़क पर जाम और दुर्घटना की आशंका को कम किया जा सकता है।
उन्होंने प्रशासन और संबंधित विभागों से इस व्यवस्था की भी जांच कराने की मांग की है।
किसानों ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग की
किसानों का कहना है कि उनकी समस्याओं को केवल शिकायत के स्तर पर न छोड़ा जाए, बल्कि मौके पर जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए। उनका कहना है कि खेतों में पहुंचने वाले पानी के नमूने और मिट्टी की जांच कराई जानी चाहिए।
इसके अलावा किसानों ने प्रस्तावित नाले के निर्माण से पहले संबंधित दस्तावेजों और अनुमति की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी निर्माण से कृषि भूमि प्रभावित होती है तो प्रभावित किसानों की बात भी सुनी जानी चाहिए।
किसान चाहते हैं कि फैक्ट्री प्रबंधन, प्रशासन, यूपीसीडा और राजस्व विभाग के अधिकारी संयुक्त रूप से मौके का निरीक्षण करें।
जांच से स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
हिंदुस्तान यूनिलीवर फैक्ट्री को लेकर किसानों द्वारा लगाए गए आरोपों में मुख्य मुद्दे पानी की निकासी, कृषि भूमि पर कथित प्रभाव, प्रस्तावित नाला और आसपास के पर्यावरण से जुड़े हैं। फिलहाल इन आरोपों पर संबंधित फैक्ट्री प्रबंधन या विभागीय अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
यदि प्रशासन मामले की जांच कराता है तो पानी और मिट्टी के नमूनों की वैज्ञानिक जांच, राजस्व रिकॉर्ड का सत्यापन और नाले के प्रस्ताव से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
किसानों और फैक्ट्री प्रबंधन के बीच समाधान की जरूरत
सुमेरपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्र में उद्योग और कृषि दोनों की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में किसानों की शिकायतों और औद्योगिक इकाई की आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
किसानों की मांग है कि उनकी कृषि भूमि को किसी भी संभावित नुकसान से बचाया जाए और पानी की निकासी की व्यवस्था नियमों के अनुसार तय की जाए। वहीं, वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए संबंधित विभागों की जांच और फैक्ट्री प्रबंधन का पक्ष महत्वपूर्ण रहेगा।
फिलहाल किसान इस मामले में प्रशासन से जांच और समाधान की उम्मीद लगाए हुए हैं। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं और जांच में पानी, जमीन तथा प्रस्तावित नाले को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।















