ग्रेटर नोएडा बस अग्निकांड में हमीरपुर के तीन लोगों की मौत, मयंक और सरोज के शव पहुंचे घर
हमीरपुर। ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे पर डबल डेकर स्लीपर बस में लगी भीषण आग ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। दिल्ली से महोबा जा रही बस में 23 सितंबर की रात आग लगने से नौ यात्रियों की मौत हो गई। हादसे में जान गंवाने वालों में हमीरपुर जिले के तीन लोग भी शामिल हैं। मृतकों की पहचान सरोज गुप्ता, मयंक गुप्ता और ऊषा देवी के रूप में हुई है।
हादसे की खबर सामने आने के बाद हमीरपुर के कई परिवार अपने परिजनों की तलाश में जुट गए थे। पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तीनों की मौत की पुष्टि हुई। शुक्रवार को सरोज और मयंक के शव हमीरपुर पहुंचे तो परिजनों और आसपास के लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। दोनों के अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
दिल्ली से लौट रहे थे मयंक और सरोज
मृतकों में राठ के मुगलपुरा क्षेत्र के निवासी मयंक गुप्ता भी शामिल थे। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक 28 वर्षीय मयंक दिल्ली की एक निजी कंपनी में इंजीनियर के तौर पर काम करते थे और दिल्ली से राठ लौटने के लिए बस में सवार हुए थे। हादसे के बाद जब उनसे संपर्क नहीं हो सका तो परिवार उनकी तलाश में जुट गया।
सरोज गुप्ता भी उसी बस से लौट रही थीं। वह कुछ दिनों के लिए अपने परिवार के लोगों से मिलने दिल्ली गई थीं और वापस हमीरपुर लौट रही थीं। हादसे के बाद परिवार को उनकी कोई जानकारी नहीं मिल सकी। बाद में पहचान की प्रक्रिया पूरी होने पर उनकी मौत की पुष्टि हुई।
हादसे की सूचना मिलने के बाद दोनों परिवारों में बेचैनी का माहौल रहा। परिजन घटनास्थल और संबंधित स्थानों पर जानकारी जुटाने में लगे रहे। आखिरकार शुक्रवार को जब दोनों के शव राठ पहुंचे तो इंतजार का अंत बेहद दर्दनाक खबर के साथ हुआ।
शव घर पहुंचते ही मचा कोहराम
शुक्रवार सुबह मयंक और सरोज के शव उनके घर पहुंचे। एंबुलेंस के पहुंचते ही परिवार के लोगों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। अंतिम दर्शन के लिए आसपास के लोग और परिचित भी बड़ी संख्या में पहुंचे।
परिजनों के लिए यह पल बेहद भावुक था। जिन लोगों के सकुशल लौटने की उम्मीद की जा रही थी, उनके शव घर पहुंचे। इसके बाद दोनों की अंतिम यात्रा निकाली गई और नम आंखों से उन्हें विदाई दी गई। दोनों के अंतिम संस्कार के दौरान स्थानीय लोगों ने परिवार के प्रति संवेदना जताई।
मुस्करा की ऊषा देवी की भी मौत
इस हादसे में हमीरपुर जिले की तीसरी मृतक ऊषा देवी थीं। पुलिस द्वारा जारी मृतकों की पहचान संबंधी जानकारी में 65 वर्षीय ऊषा देवी का नाम भी सामने आया था। वह मुस्करा क्षेत्र की रहने वाली थीं।
स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक ऊषा देवी अपने परिवार के लोगों से मिलने नोएडा गई थीं और वहां से वापस लौट रही थीं। हादसे के बाद उनकी पहचान की प्रक्रिया भी परिवार के लिए बेहद कठिन रही। स्थानीय रिपोर्ट में बताया गया कि उनकी पहचान आभूषण के आधार पर की गई।
इस तरह एक ही जिले के तीन परिवारों ने इस हादसे में अपने अपनों को खो दिया। किसी परिवार के लिए यह बेटी, मां या रिश्तेदार का बिछड़ना था तो किसी के लिए घर के कमाने वाले सदस्य का जाना।
यमुना एक्सप्रेसवे पर कैसे हुआ हादसा?
पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बस दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा की ओर जा रही थी। इसमें करीब 35 यात्री सवार थे। रात करीब 11 बजे के आसपास जेवर क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में आग लग गई। देखते ही देखते आग तेजी से फैल गई और बस के अंदर धुआं भर गया। कई यात्रियों ने किसी तरह बस से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई, जबकि कुछ लोग अंदर फंस गए।
हादसे में कुल नौ यात्रियों की मौत हुई। अधिकारियों के मुताबिक मृतकों में से छह की पहचान हो चुकी थी, जिनमें हमीरपुर के तीन लोग भी शामिल थे।
घटना के बाद बस की सुरक्षा व्यवस्था और संचालन को लेकर भी कई सवाल उठे हैं। मीडिया रिपोर्टों में बस के फिटनेस और चालान से जुड़ी जानकारियां सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि बस में आपातकालीन निकास और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल सामने आए। इन पहलुओं की जांच संबंधित अधिकारियों द्वारा की जा रही है।
तीन परिवारों में पसरा मातम
ग्रेटर नोएडा का यह बस अग्निकांड केवल एक सड़क हादसा नहीं रहा। इसने हमीरपुर के तीन परिवारों की जिंदगी बदल दी। हादसे के बाद जब तक पहचान की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तब तक परिवारों की चिंता बनी रही। शव घर पहुंचने के बाद इंतजार खत्म हुआ, लेकिन इसके साथ ही परिवारों पर अपनों को खोने का दुख टूट पड़ा।
राठ में मयंक और सरोज को अंतिम विदाई के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। पूरे इलाके में शोक का माहौल रहा। वहीं मुस्करा क्षेत्र में ऊषा देवी की मौत की खबर से भी परिवार और परिचितों में गम का माहौल है।
एक चलती बस में लगी आग ने कुछ ही देर में कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। पीछे रह गईं परिवार की यादें, अपनों के साथ बिताए पल और एक ऐसा दर्द जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।















