UP अनकट डिजिटल। देशभर में गणेश चतुर्थी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। सुबह से ही मंदिरों, घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के लिए लोगों की भीड़ जुटने लगी। ढोल-नगाड़ों की गूंज, ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारे और रंग-बिरंगी सजावट ने माहौल को पूरी तरह उत्सव में बदल दिया। महाराष्ट्र से लेकर उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, गुजरात और देश के दूसरे हिस्सों तक गणेश उत्सव की रौनक देखने को मिल रही है।गणेश चतुर्थी के मौके पर श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा करते हैं। घरों में विशेष सजावट की गई है, जबकि शहरों में बड़े-बड़े पंडाल आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। कहीं पारंपरिक तरीके से पूजा हो रही है तो कहीं सामाजिक संदेश देने वाली झांकियां लोगों का ध्यान खींच रही हैं।
सुबह से शुरू हुई पूजा, घर-घर में बप्पा का स्वागत
गणेश चतुर्थी के दिन सुबह से ही बाजारों में चहल-पहल दिखाई दी। लोग गणेश प्रतिमा, फूल, माला, दूर्वा, मोदक और पूजा सामग्री खरीदते नजर आए। कई परिवारों ने अपने घरों में भगवान गणेश की छोटी प्रतिमा स्थापित की, जबकि सार्वजनिक आयोजनों के लिए बड़ी और आकर्षक प्रतिमाएं तैयार की गईं।
मान्यता है कि भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और शुभारंभ का देवता माना जाता है। इसी कारण नए काम की शुरुआत से लेकर पारिवारिक पूजा तक में गणेश जी का विशेष स्थान है। श्रद्धालुओं ने पूजा के दौरान सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की।
पंडालों में उमड़ी भीड़, सजावट बनी आकर्षण
गणेश उत्सव का सबसे ज्यादा असर सार्वजनिक पंडालों में दिखाई दे रहा है। शहरों में अलग-अलग समितियों ने कई दिन पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी थीं। पंडालों को फूलों, रोशनी और अलग-अलग थीम के जरिए सजाया गया है।
कई जगहों पर धार्मिक प्रसंगों और भारतीय संस्कृति को दर्शाती झांकियां बनाई गई हैं। रात के समय रंगीन रोशनी और सजावट इन पंडालों की खूबसूरती को और बढ़ा रही है। परिवार के साथ लोग पंडालों में पहुंच रहे हैं और भगवान गणेश के दर्शन कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर भी गणेश उत्सव की तस्वीरें और वीडियो तेजी से साझा किए जा रहे हैं। गणपति की आकर्षक प्रतिमाओं, पंडालों की सजावट और विसर्जन की तैयारियों से जुड़े वीडियो लोगों के बीच खूब चर्चा में हैं।
युवाओं में दिखा खास उत्साह
गणेश उत्सव में इस बार युवाओं की भागीदारी भी खास नजर आ रही है। पूजा समितियों की तैयारियों से लेकर पंडाल की सजावट, सोशल मीडिया प्रचार और व्यवस्था संभालने तक युवा बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
कई जगहों पर युवाओं ने पारंपरिक उत्सव के साथ सामाजिक संदेश को भी जोड़ने की कोशिश की है। रक्तदान, स्वच्छता, जरूरतमंदों की मदद और पर्यावरण संरक्षण जैसे अभियानों को गणेश उत्सव से जोड़कर लोगों तक संदेश पहुंचाया जा रहा है।
इससे त्योहार सिर्फ पूजा और मनोरंजन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम भी बनता है।
बाजार में बढ़ी रौनक, कारोबार को भी मिला सहारा
गणेश चतुर्थी के चलते बाजारों में भी रौनक बढ़ गई है। गणेश प्रतिमाओं के अलावा फूल, सजावटी सामान, पूजा सामग्री, मिठाई और प्रसाद की दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही बढ़ी है।
मोदक और गणेश जी को पसंद आने वाले दूसरे प्रसाद की मांग भी बढ़ी है। छोटे दुकानदारों और स्थानीय कारीगरों के लिए त्योहार का मौसम कारोबार बढ़ाने का मौका लेकर आता है।
प्रतिमा बनाने वाले कारीगरों का काम भी कई सप्ताह पहले से तेज हो जाता है। मिट्टी, रंग और सजावट के सामान से तैयार की गई प्रतिमाएं अलग-अलग आकार और डिजाइन में बाजार में उपलब्ध हैं।
पर्यावरण को लेकर भी बढ़ी जागरूकता
गणेश उत्सव के साथ पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा भी लगातार चर्चा में रहता है। कई स्थानों पर श्रद्धालु मिट्टी से बनी प्रतिमाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। आयोजक भी लोगों से ऐसी प्रतिमाओं का इस्तेमाल करने की अपील कर रहे हैं, जिनसे जल स्रोतों को नुकसान न पहुंचे।
कई जगहों पर कृत्रिम तालाब या निर्धारित विसर्जन स्थल तैयार किए जाते हैं। इसका उद्देश्य नदियों और तालाबों को प्रदूषण से बचाना है। पूजा समितियां लोगों से फूल-माला और अन्य पूजा सामग्री को जल स्रोतों में न डालने की अपील भी कर रही हैं।
सुरक्षा और यातायात पर प्रशासन की नजर
गणेश उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के घरों से बाहर निकलने के कारण प्रशासन के सामने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती भी रहती है। प्रमुख बाजारों और पंडालों के आसपास पुलिस की तैनाती बढ़ाई जाती है।
भीड़ वाले क्षेत्रों में यातायात को नियंत्रित करने के साथ महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। आयोजकों से भी अपील की जाती है कि पंडालों में आने वाले लोगों के लिए पर्याप्त जगह और जरूरी सुरक्षा इंतजाम रखें।
आस्था के साथ सामाजिक एकता का संदेश
गणेश चतुर्थी का उत्सव कई इलाकों में अलग-अलग समुदायों और वर्गों के लोगों को एक साथ जोड़ता दिखाई देता है। सार्वजनिक पंडालों में स्थानीय लोग मिलकर व्यवस्था संभालते हैं। पूजा, प्रसाद वितरण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।
यही वजह है कि गणेश उत्सव धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक मेलजोल का भी बड़ा अवसर बन गया है। शहरों में रहने वाले लोग भी इस पर्व के बहाने अपने पड़ोस और समुदाय से जुड़ते हैं।
‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों से गूंजेगा माहौल
गणेश चतुर्थी के साथ शुरू हुआ उत्सव आने वाले दिनों में और रंग पकड़ेगा। पूजा, भजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और पंडालों में दर्शन का सिलसिला जारी रहेगा। इसके बाद गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु सड़कों पर उतरेंगे।
ढोल की थाप, गुलाल और ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों के बीच लोग बप्पा को विदाई देंगे। श्रद्धालुओं के लिए यह सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भावनाओं, आस्था और सामूहिक उत्साह से जुड़ा पर्व है।
गणेश चतुर्थी का संदेश भी यही है कि उत्सव में आस्था के साथ जिम्मेदारी जुड़ी हो। श्रद्धा बनी रहे, पर पर्यावरण और सार्वजनिक व्यवस्था का ध्यान भी रखा जाए। इसी संतुलन के साथ गणपति उत्सव की खुशियां लंबे समय तक लोगों के बीच बनी रह सकती हैं।















