बांदा में 12 साल से राशन कार्ड की आस, दिव्यांग ने प्रशासन से लगाई गुहार
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से सरकारी योजनाओं के लाभ को लेकर एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती है। नरैनी तहसील क्षेत्र के स्योढ़ा गांव निवासी दिव्यांग बृजभूषण का कहना है कि वह पिछले करीब 12 वर्षों से राशन कार्ड बनवाने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है।
बृजभूषण के मुताबिक उन्होंने वर्ष 2014 से राशन कार्ड बनवाने की कोशिश शुरू की थी। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों और विभागीय कार्यालयों में कई बार प्रार्थना पत्र दिए। आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बावजूद उनका राशन कार्ड नहीं बन सका। उनका आरोप है कि हर बार उन्हें कार्रवाई का भरोसा दिया गया, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही।
आर्थिक तंगी के बीच सरकारी राशन का सहारा
बृजभूषण की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर बताई जा रही है। उनका कहना है कि उनके पास आय का कोई नियमित साधन नहीं है। दैनिक जरूरतों और भोजन का इंतजाम भी काफी मुश्किल से हो पाता है। कुछ लोग समय-समय पर मदद कर देते हैं, जिसके सहारे उनका गुजारा चल रहा है।
बृजभूषण के अनुसार उन्हें करीब एक हजार रुपये की पेंशन मिलती है, लेकिन पिछले आठ से नौ महीने से पेंशन भी नहीं मिली है। ऐसे में उनकी आर्थिक परेशानियां और बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि यदि उन्हें राशन कार्ड मिल जाए तो सरकारी खाद्यान्न योजना का लाभ मिल सकता है और कम से कम भोजन की चिंता कुछ हद तक कम हो सकती है।
2014 से अधिकारियों के चक्कर काटने का दावा
बृजभूषण का कहना है कि राशन कार्ड बनवाने के लिए उन्होंने एक-दो बार नहीं, बल्कि कई बार संबंधित विभागों और अधिकारियों से संपर्क किया। हर बार उन्होंने अपनी स्थिति बताते हुए प्रार्थना पत्र दिया और जरूरी कागजात उपलब्ध कराए।
इसके बावजूद करीब 12 वर्षों का लंबा समय गुजर गया, लेकिन राशन कार्ड नहीं बन पाया। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने की बात लगातार कही जाती है, लेकिन उनके जैसे व्यक्ति को लाभ पाने के लिए वर्षों तक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
उनकी शिकायत सिर्फ राशन कार्ड तक सीमित नहीं है। पेंशन का भुगतान भी कई महीनों से नहीं होने की बात सामने आई है। ऐसे में एक दिव्यांग व्यक्ति के लिए रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना और भी कठिन हो गया है।
डीएम कार्यालय पहुंचकर फिर लगाई गुहार
अपनी समस्या के समाधान की उम्मीद में बृजभूषण एक बार फिर बांदा जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी परेशानी रखी और राशन कार्ड बनवाने के साथ-साथ लंबित पेंशन की समस्या के समाधान की भी उम्मीद जताई।
जिलाधिकारी कार्यालय में उन्होंने अपना प्रार्थना पत्र अधिकारियों को सौंपा। इस दौरान नगर मजिस्ट्रेट दिनेश चंद्र ने उनकी शिकायत सुनी और प्रार्थना पत्र लेकर मामले में त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
प्रशासन की ओर से मिले आश्वासन के बाद अब बृजभूषण को उम्मीद है कि इस बार उनकी समस्या का समाधान हो सकेगा। लंबे समय से सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए संघर्ष कर रहे बृजभूषण के लिए राशन कार्ड केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि परिवार के लिए खाद्य सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है।
अब कार्रवाई का इंतजार
बृजभूषण की शिकायत सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर करीब 12 वर्षों से लंबित राशन कार्ड का मामला अब कब तक सुलझेगा। प्रशासन की ओर से त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है, लेकिन पीड़ित को वास्तविक राहत तभी मिलेगी, जब राशन कार्ड बनकर उसे सरकारी राशन योजना का लाभ मिल सके।
इसके साथ ही यदि उनकी पेंशन वास्तव में पिछले कई महीनों से लंबित है, तो उसके भुगतान की प्रक्रिया भी जल्द पूरी होना जरूरी है। आर्थिक रूप से कमजोर और दिव्यांग व्यक्ति के लिए पेंशन तथा खाद्य सुरक्षा जैसी सरकारी योजनाएं बेहद महत्वपूर्ण होती हैं।
बृजभूषण की फरियाद अब प्रशासन के सामने है। देखना होगा कि नगर मजिस्ट्रेट के आश्वासन के बाद संबंधित विभाग कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और वर्षों से सरकारी राशन की उम्मीद लगाए बैठे इस दिव्यांग व्यक्ति को आखिर कब राहत मिलती है।
बाइट: दिनेश चंद्र — सिटी मजिस्ट्रेट
बाइट: बृजभूषण — पीड़ित/दिव्यांग















