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कमालगंज CHC में प्रसूता की परेशानी

फर्रुखाबाद में सरकारी अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल, प्रसूता घंटों अस्पताल के बाहर परेशान

फर्रुखाबाद के कमालगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। प्रसव पीड़ा के बीच सीएचसी पहुंची एक महिला को कथित तौर पर समय पर भर्ती नहीं किए जाने और अस्पताल के बाहर घंटों परेशान होने का आरोप परिजनों ने लगाया है। इस दौरान प्रसूता को जांच के लिए पैथोलॉजी ले जाने के लिए व्हीलचेयर नहीं मिलने की बात भी कही जा रही है।

परिजनों का दावा है कि काफी देर बाद जांच पूरी होने पर महिला को अस्पताल में भर्ती किया गया। इसके बाद प्रसव के दौरान बच्चे की मौत हो गई। बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्था और इलाज में कथित लापरवाही को लेकर सवाल उठाए हैं।

पूरे घटनाक्रम से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि और बच्चे की मौत के वास्तविक चिकित्सकीय कारण की पुष्टि जांच व मेडिकल रिकॉर्ड से ही हो सकेगी।

प्रसव पीड़ा में सीएचसी पहुंची थी महिला

परिजनों के मुताबिक, महिला को प्रसव पीड़ा होने पर कमालगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था। परिवार को उम्मीद थी कि अस्पताल पहुंचने के बाद प्रसूता को तत्काल चिकित्सकीय निगरानी में लिया जाएगा और आवश्यक उपचार शुरू होगा।

आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बावजूद महिला को तुरंत भर्ती नहीं किया गया। परिजनों का कहना है कि प्रसूता काफी देर तक अस्पताल परिसर के बाहर बेंच पर ही परेशान होती रही।

प्रसव पीड़ा की स्थिति में महिला को अस्पताल के बाहर बैठे हुए दिखाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने की बात कही जा रही है। वीडियो को लेकर स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

हालांकि, महिला को तत्काल भर्ती क्यों नहीं किया गया और उस समय अस्पताल की ओर से क्या चिकित्सकीय निर्णय लिया गया था, इसका स्पष्ट जवाब अस्पताल प्रशासन की ओर से सामने आना बाकी है।

व्हीलचेयर नहीं मिलने का भी आरोप

मामले में सबसे गंभीर सवालों में से एक प्रसूता को व्हीलचेयर उपलब्ध नहीं कराए जाने का आरोप है। परिजनों के अनुसार, डॉक्टर की ओर से जांच कराने के लिए पर्चा दिया गया था।

आरोप है कि प्रसूता को पैथोलॉजी तक ले जाने के लिए अस्पताल में व्हीलचेयर उपलब्ध नहीं कराई गई। प्रसव पीड़ा से गुजर रही महिला को जांच के लिए ले जाने में परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ा।

परिजनों का दावा है कि इस दौरान महिला को अस्पताल के बाहर ही काफी समय तक परेशानी झेलनी पड़ी। बाद में जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती किया गया।

यदि अस्पताल में व्हीलचेयर उपलब्ध नहीं थी या उसे समय पर उपलब्ध नहीं कराया गया, तो यह मरीजों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं और विशेष रूप से प्रसूता की देखभाल को लेकर सवाल खड़े करता है। हालांकि, इस संबंध में अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आना आवश्यक है।

डिलीवरी के दौरान बच्चे की मौत

परिजनों के अनुसार, जांच के बाद महिला को अस्पताल में भर्ती किया गया और इसके बाद उसकी डिलीवरी हुई। परिवार का कहना है कि डिलीवरी के दौरान बच्चे की मौत हो गई।

बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और कथित देरी को लेकर सवाल उठाए। परिवार का आरोप है कि यदि महिला को समय पर आवश्यक चिकित्सा सहायता मिलती तो स्थिति अलग हो सकती थी।

हालांकि, बच्चे की मौत के वास्तविक कारण को लेकर अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। इसके लिए चिकित्सकीय रिकॉर्ड, प्रसव से पहले महिला की स्थिति, जांच रिपोर्ट, इलाज के दौरान किए गए मेडिकल हस्तक्षेप और डॉक्टरों की राय महत्वपूर्ण होगी।

इसलिए फिलहाल बच्चे की मौत को सीधे तौर पर अस्पताल की कथित लापरवाही से जोड़ना जांच के बिना उचित नहीं होगा।

डिलीवरी के नाम पर 1100 रुपये लेने का आरोप

परिजनों ने अस्पताल के कर्मचारियों पर डिलीवरी के नाम पर 1100 रुपये लिए जाने का आरोप भी लगाया है। परिवार का दावा है कि इलाज और प्रसव की प्रक्रिया के दौरान उन्हें आर्थिक भुगतान के लिए भी परेशान होना पड़ा।

सरकारी अस्पताल में किसी सेवा के लिए अनधिकृत रकम लिए जाने का आरोप गंभीर विषय है। यदि ऐसी कोई राशि ली गई है, तो उसकी जांच के जरिए यह स्पष्ट किया जा सकता है कि भुगतान किस कर्मचारी ने लिया, किस मद में लिया गया और क्या उसके लिए कोई अधिकृत शुल्क निर्धारित था।

इस मामले में परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना जरूरी है। अस्पताल प्रशासन और संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही इस आरोप की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

वीडियो वायरल होने के बाद उठे सवाल

घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात कही जा रही है। वीडियो में प्रसूता को अस्पताल के बाहर परेशान होने का दावा किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद सरकारी स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई।

हालांकि, किसी वायरल वीडियो के आधार पर पूरे घटनाक्रम का निष्कर्ष निकालना पर्याप्त नहीं है। वीडियो कब का है, उसमें दिखाई दे रही महिला वही प्रसूता है या नहीं और घटना के दौरान अस्पताल में क्या चिकित्सकीय प्रक्रिया चल रही थी, इन सभी बिंदुओं की पुष्टि जरूरी है।

अस्पताल प्रशासन के जवाब का इंतजार

मामले में अब अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है। यह स्पष्ट होना जरूरी है कि प्रसूता को अस्पताल पहुंचने के बाद कब और किस स्थिति में भर्ती किया गया, जांच के लिए उसे किस तरह ले जाया गया और डिलीवरी के दौरान बच्चे की चिकित्सकीय स्थिति क्या थी।

साथ ही 1100 रुपये लेने के आरोप पर भी अस्पताल प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी होगी। यदि शिकायत दर्ज होती है तो संबंधित अधिकारियों द्वारा रिकॉर्ड और स्टाफ की भूमिका की जांच की जा सकती है।

जांच के बाद साफ होगी स्थिति

कमालगंज सीएचसी से सामने आया यह मामला सरकारी अस्पतालों में प्रसूता की देखभाल, मरीजों को समय पर सहायता और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

फिलहाल परिवार की ओर से अस्पताल पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। बच्चे की मौत का कारण भी चिकित्सकीय जांच और रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगा।

अब निगाह अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया पर है। यदि मामले की जांच होती है तो उससे यह स्पष्ट हो सकता है कि प्रसूता को अस्पताल पहुंचने के बाद किस स्तर की चिकित्सा सुविधा मिली, व्हीलचेयर उपलब्ध कराने में क्या स्थिति रही और 1100 रुपये लेने के आरोप में कितनी सच्चाई है।

जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि घटना में किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी या नहीं।

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