लोड हो रहा है...
ब्रेकिंग न्यूज़
खबरें लोड हो रही हैं...
हमें फॉलो करें :

हमीरपुर में अधिवक्ताओं की हड़ताल

हमीरपुर में अधिवक्ताओं की हड़ताल

हमीरपुर में अधिवक्ताओं की हड़ताल, प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग

हमीरपुर में अधिवक्ताओं ने विभिन्न मांगों को लेकर जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करते हुए कामकाज बंद रखा। जिला बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी मांगों को प्रशासन के सामने रखा। अधिवक्ताओं ने मुख्य रूप से एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने, नए अधिवक्ताओं को आर्थिक सहायता देने और खुले स्थानों पर बैठने वाले वकीलों के लिए बेहतर व्यवस्था किए जाने की मांग उठाई।

जिला मुख्यालय पहुंचकर अधिवक्ताओं ने किया प्रदर्शन

अधिवक्ताओं का प्रदर्शन जिला बार एसोसिएशन के आह्वान पर हुआ। अधिवक्ता नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया। इस दौरान अधिवक्ताओं ने काम से विरत रहने का निर्णय लिया।

प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने कहा कि उनकी मांगें लंबे समय से जुड़ी हुई हैं और इन्हें लेकर सरकार तथा संबंधित स्तर पर प्रभावी कदम उठाए जाने की जरूरत है। उनका कहना है कि अधिवक्ता न्यायिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और अपने काम के दौरान कई तरह की परिस्थितियों का सामना करते हैं।

एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग

प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं की प्रमुख मांग एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की रही। अधिवक्ताओं का कहना है कि वे आपराधिक मामलों में पीड़ितों और आरोपित पक्षों की कानूनी पैरवी करते हैं और कई बार संवेदनशील मामलों में काम करते हुए दबाव का सामना करना पड़ता है।

अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि आए दिन वकीलों के साथ मारपीट और उन्हें परेशान किए जाने की घटनाएं सामने आती हैं। इसके अलावा कुछ मामलों में अधिवक्ताओं पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए जाने की बात भी उन्होंने कही। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक ऐसी परिस्थितियों में अधिवक्ताओं की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट कानूनी व्यवस्था जरूरी है।

नए अधिवक्ताओं के लिए 5 हजार रुपये लाइब्रेरी भत्ते की मांग

अधिवक्ताओं ने नए वकीलों के लिए आर्थिक सहायता की मांग भी रखी। उनका कहना है कि न्यायिक क्षेत्र में शुरुआती दौर में नए अधिवक्ताओं के सामने आर्थिक चुनौतियां रहती हैं।

इसी को देखते हुए उन्होंने नए अधिवक्ताओं को हर महीने पांच हजार रुपये लाइब्रेरी भत्ते के रूप में दिए जाने की मांग की। अधिवक्ताओं का कहना है कि इस सहायता से नए वकीलों को अपने पेशे से जुड़ी किताबों, कानूनी सामग्री और अन्य जरूरी संसाधनों की व्यवस्था करने में मदद मिल सकती है।

खुले स्थान पर बैठने वाले अधिवक्ताओं के लिए व्यवस्था की मांग

प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने बैठने की व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि कई अधिवक्ताओं को खुले आसमान के नीचे बैठकर काम करना पड़ता है। इससे मौसम के दौरान उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।

अधिवक्ताओं ने मांग की कि ऐसे वकीलों के लिए उचित स्थान और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जाए, ताकि वे अपने पेशे से जुड़े काम को बेहतर तरीके से कर सकें। उनके मुताबिक यह सुविधा अधिवक्ताओं के कार्यस्थल से जुड़ी बुनियादी जरूरतों में शामिल है।

मारपीट और फर्जी मुकदमों का मुद्दा उठाया

अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा से जुड़े मामलों को प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि अधिवक्ताओं के साथ मारपीट की घटनाएं सामने आती रहती हैं और कई बार उन्हें मुकदमों का सामना भी करना पड़ता है।

अधिवक्ताओं ने मांग की कि उनके खिलाफ होने वाली कथित हिंसा या उत्पीड़न की घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई हो और उन्हें कानूनी सुरक्षा मिले। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक अधिवक्ताओं की सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर ठोस व्यवस्था नहीं होती, तब तक इस मुद्दे को उठाया जाता रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट के हड़ताल संबंधी आदेश का भी विरोध

प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के हड़ताल नहीं करने संबंधी आदेश का भी मुद्दा उठाया। अधिवक्ताओं ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और मौजूदा परिस्थितियों में काम बंद कर विरोध दर्ज कराना जरूरी समझते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगों पर समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी। अधिवक्ताओं के मुताबिक अगले मंगलवार को आम सभा आयोजित कर आगे के कदम पर चर्चा की जाएगी।

जिला बार एसोसिएशन ने आगे की रणनीति के संकेत दिए

जिला बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं की मांगों को लेकर एकजुटता दिखाई। अधिवक्ताओं का कहना है कि उनकी मांगें केवल हमीरपुर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रदेश के कई हिस्सों में अधिवक्ताओं से जुड़े मुद्दे उठाए जा रहे हैं।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन और सरकार की ओर से अधिवक्ताओं की मांगों को लेकर क्या कदम उठाया जाता है। वहीं, आम सभा में प्रस्तावित बैठक के बाद आंदोलन की आगे की दिशा भी स्पष्ट होने की उम्मीद है।

मांगों पर कार्रवाई को लेकर बनी रहेगी नजर

हमीरपुर में अधिवक्ताओं के प्रदर्शन ने एक बार फिर वकीलों की सुरक्षा और कार्यस्थल से जुड़ी समस्याओं को चर्चा में ला दिया है। एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट, नए अधिवक्ताओं के लिए आर्थिक सहायता और बैठने की व्यवस्था जैसी मांगों को लेकर अधिवक्ताओं ने अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाई है।

फिलहाल अधिवक्ताओं ने मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में आगे आंदोलन की रणनीति तय करने की बात कही है। अब संबंधित विभागों और सरकार की ओर से इन मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर अधिवक्ताओं के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

कानपुर विकास प्राधिकरण कार्यालय और कथित अनियमितताओं से जुड़ी खबर

कानपुर विकास प्राधिकरण में कथित अनियमितताओं पर उठे सवाल, बर्खास्त कर्मचारी राकेश रावत ने लगाए गंभीर आरोप कानपुर

कानपुर विकास प्राधिकरण में कथित वित्तीय अनियमितताओं और बर्खास्तगी को लेकर पूर्व कर्मचारी राकेश रावत ने सवाल उठाए हैं। मामले में निष्पक्ष जांच और आधिकारिक जवाब की मांग महत्वपूर्ण है।

कानपुर: डॉ. संजय काला की टीम का कमाल! हैलट में जटिल ऑपरेशन कर निकालीं 70 पथरियां

कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने जटिल ऑपरेशन कर 46 वर्षीय मरीज की मुख्य पित्त नली से करीब 70 पथरियां निकालीं। इससे पहले दो ओपन सर्जरी और चार ईआरसीपी प्रयास सफल नहीं हुए थे।

नरेंद्र शर्मा परवाना की भारतीय प्रेस परिषद की सदस्यता तक की प्रेरणादायक यात्रा और 64 वर्षों के जीवन अनुभव

नरेंद्र शर्मा परवाना के 64 वर्षों के अनुभव की कहानी

नरेंद्र शर्मा परवाना का 64 वर्षों का जीवन सफर संस्कार, सेना में सेवा, साहित्य साधना और पत्रकारिता के संघर्ष की प्रेरक कहानी है। भारतीय प्रेस परिषद की सदस्यता तक पहुंचने का उनका सफर मेहनत, अनुशासन और जिम्मेदारी का संदेश देता है।