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Sitamarhi News: सीतामढ़ी में सामाजिक-सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने के लिए वंशावली संरक्षण की पहल शुरू हुई है. साथ ही, जैविक खेती को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए 10 सितंबर से केंचुआ खाद बनाने का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. यह पहल डिजिटल माध्यम से भी की जाएगी.
सीतामढ़ी: आधुनिकता के दौर में सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहरों को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. इसी को देखते हुए समाज के प्रबुद्ध लोगों और युवाओं ने समुदाय की खोती जा रही वंशावली और सांस्कृतिक जड़ों को सहेजने की पहल शुरू की है. हाल ही में आयोजित एक विशेष बैठक में वंशावली, पारिवारिक इतिहास और सामाजिक परंपराओं को संरक्षित करने को लेकर गंभीर चर्चा हुई.
बैठक में मौजूद लोगों ने चिंता जताई कि बदलते समय के साथ नई पीढ़ी अपनी परंपराओं और पारिवारिक इतिहास से दूर होती जा रही है. ऐसे में पूरे समाज को एक मंच पर लाने और पुराने दस्तावेजों, पारिवारिक जानकारी तथा सामाजिक इतिहास से जुड़े तथ्यों को एकत्र करने का निर्णय लिया गया. इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को उनकी जड़ों और विरासत से जोड़ना है.
डिजिटल माध्यम से सहेजी जाएगी वंशावली
इस मुहिम को डिजिटल माध्यम से जोड़कर व्यापक स्तर पर ले जाने की योजना है. एकत्र की गई वंशावली और सामाजिक इतिहास से संबंधित जानकारियों को सोशल मीडिया तथा अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जाएगा. जिला कृषि पदाधिकारी शांतनु कुमार ने भी इस पहल का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि अपनी जड़ों और इतिहास से जुड़े रहना किसी भी समाज के लिए बेहद जरूरी है. अभियान के जरिए समाज के लोगों को जोड़ने और बिखरी हुई ऐतिहासिक धरोहर को एक स्थान पर संकलित करने का प्रयास किया जाएगा.
10 सितंबर से किसानों को मिलेगा प्रशिक्षण
कृषि और ग्रामीण विकास को गति देने के लिए जिला प्रशासन और कृषि विभाग की ओर से जैविक खेती को बढ़ावा देने की पहल भी की जा रही है. किसानों की आय बढ़ाने और खेती की लागत कम करने के उद्देश्य से केंचुआ खाद यानी वर्मीकंपोस्ट तैयार करने का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. यह प्रशिक्षण 10 सितंबर से शुरू होगा. प्रशिक्षण के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र और जिला कृषि कार्यालय में किसानों को वर्मीकंपोस्ट तैयार करने की आधुनिक और व्यावहारिक तकनीक बताई जाएगी.
किसानों को बेड तैयार करने, रखरखाव, तापमान नियंत्रण और खाद के उचित प्रबंधन की जानकारी दी जाएगी. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, जैविक खाद के इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरक क्षमता बेहतर होने के साथ खेती की लागत भी कम हो सकती है. इच्छुक किसान प्रशिक्षण से जुड़ने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र या जिला कृषि कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं.
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अमित रंजन वर्तमान में News18 में बिहार, झारखंड और दिल्ली से जुड़ी खबरों के समन्वय और संपादन का कार्य देख रहे हैं. खोजी पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है. राजनीति, शिक्षा, खेल, क्राईम और मौसम जैसे विषयों …
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