23 सितंबर को राजधानी से मानसून पीछे हटा, उत्तर भारत के मौसम में अब दिखेगा बदलाव
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई सामान्य समय से पहले हो गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD के अनुसार 23 सितंबर 2026 को दिल्ली से मानसून की वापसी दर्ज की गई। वर्ष 2002 के बाद यह राजधानी से मानसून की सबसे जल्दी विदाई है।
मौसम विभाग के अनुसार मानसून की वापसी केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रही है। उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में भी मानसून धीरे-धीरे पीछे हट रहा है।
मानसून की वापसी कैसे तय होती है?
मानसून की विदाई केवल बारिश रुकने से तय नहीं होती। मौसम विभाग वातावरण में नमी, बारिश की गतिविधि और वायुमंडलीय परिस्थितियों जैसे कई संकेतों का अध्ययन करता है।
जब इन परिस्थितियों में लगातार बदलाव दिखाई देता है और बारिश का क्षेत्र पीछे हटने लगता है, तब मौसम विभाग मानसून की वापसी की घोषणा करता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि संबंधित क्षेत्र में इसके बाद बारिश बिल्कुल नहीं होगी। स्थानीय मौसम परिस्थितियों के कारण हल्की या तेज बारिश की घटनाएं कुछ समय तक जारी रह सकती हैं।
दिल्ली में बारिश का इस बार कैसा रहा असर?
इस साल दिल्ली में मानसून का पैटर्न कुछ अलग रहा। राजधानी में मानसून के दौरान कुल बारिश सामान्य स्तर से ऊपर रही। बारिश के कारण कई बार जलभराव और यातायात से जुड़ी परेशानियां भी सामने आईं।
अब मानसून के पीछे हटने के साथ बारिश की गतिविधियों में धीरे-धीरे कमी आने की उम्मीद है। इससे जलभराव वाले इलाकों में लोगों को राहत मिल सकती है।
उत्तर भारत में बदलने लगे मौसम के संकेत
दिल्ली के साथ पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बड़े हिस्सों से भी मानसून की वापसी दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश और गुजरात के कुछ क्षेत्रों में भी मानसून के पीछे हटने के संकेत मिले हैं।
मानसून के बाद उत्तर-पश्चिम भारत में वातावरण धीरे-धीरे शुष्क होने लगता है। दिन में धूप और गर्मी बनी रह सकती है, जबकि आने वाले सप्ताहों में सुबह और रात के तापमान में बदलाव दिखाई देने लगेगा।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मानसून की विदाई?
कृषि क्षेत्र के लिए मानसून की वापसी का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। खरीफ फसलों की स्थिति काफी हद तक बारिश और मिट्टी में मौजूद नमी पर निर्भर करती है।
जिन इलाकों में अधिक बारिश हुई है, वहां खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की जरूरत हो सकती है। वहीं कम बारिश वाले क्षेत्रों में मिट्टी की नमी और फसल की स्थिति अलग हो सकती है।
किसानों के लिए स्थानीय मौसम पूर्वानुमान इसलिए महत्वपूर्ण रहेगा।
दिल्ली की हवा पर भी नजर
मानसून की विदाई के बाद दिल्ली-NCR में मौसम की परिस्थितियां बदलेंगी। आने वाले महीनों में तापमान, हवा की गति और नमी जैसे कारक वायु गुणवत्ता को प्रभावित करेंगे।
हालांकि मानसून की वापसी को सीधे सर्दियों के प्रदूषण से जोड़ना उचित नहीं होगा। वायु गुणवत्ता कई अलग-अलग मौसम और मानवीय गतिविधियों पर निर्भर करती है।
यूपी में भी मौसम बदलेगा
उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों से मानसून की वापसी शुरू हो गई है। राज्य के पश्चिमी हिस्सों में मौसम में बदलाव पहले दिखाई दे सकता है। हालांकि पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश में स्थानीय परिस्थितियों के कारण बारिश की गतिविधियां कुछ समय तक बनी रह सकती हैं।
कानपुर, लखनऊ सहित अन्य शहरों में तापमान और बारिश की स्थिति के लिए स्थानीय पूर्वानुमान देखना जरूरी होगा।
आगे क्या?
मानसून की वापसी अब धीरे-धीरे देश के दूसरे हिस्सों की ओर बढ़ेगी। दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में बारिश की स्थिति उत्तर-पश्चिम भारत से अलग रह सकती है।
दिल्ली से 23 सितंबर को मानसून की वापसी इस साल के मानसूनी मौसम का महत्वपूर्ण पड़ाव है। आने वाले दिनों में उत्तर भारत में मौसम के अधिक शुष्क होने और तापमान में धीरे-धीरे बदलाव की संभावना रहेगी।















