भारत के सॉफ्टवेयर और IT-enabled services निर्यात में 8.2% की वृद्धि हुई है। RBI के सर्वे के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में निर्यात 221.4 अरब डॉलर पहुंचा, जिसमें 7,569 कंपनियों को शामिल किया गया।
नई दिल्ली। दुनिया के तकनीकी बाजार में भारत की भूमिका लगातार मजबूत बनी हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के वार्षिक सर्वे के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के सॉफ्टवेयर और IT-enabled services के निर्यात में 8.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके साथ ही कुल निर्यात का आंकड़ा 221.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
RBI के इस सर्वे में देश की 7,569 सॉफ्टवेयर निर्यात कंपनियों से जुड़ी जानकारी को शामिल किया गया। आंकड़े ऐसे समय आए हैं जब वैश्विक स्तर पर कंपनियां डिजिटल सेवाओं, क्लाउड तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा आधारित समाधानों पर लगातार निवेश बढ़ा रही हैं।
विदेशों से होने वाली कमाई में IT की बड़ी हिस्सेदारी
भारत का सॉफ्टवेयर उद्योग लंबे समय से देश की सेवा अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। भारतीय कंपनियां दुनिया के कई देशों में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से लेकर तकनीकी सलाह, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और बिजनेस प्रोसेस से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं।
निर्यात में बढ़ोतरी का मतलब है कि विदेशी ग्राहकों से भारतीय कंपनियों को मिलने वाला कारोबार बढ़ा है। इससे देश में विदेशी मुद्रा की आमद भी होती है। यही वजह है कि सॉफ्टवेयर निर्यात के आंकड़ों को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण संकेतकों में गिना जाता है।
7,569 कंपनियों के आंकड़ों से सामने आई तस्वीर
RBI के सर्वे में शामिल 7,569 कंपनियां सॉफ्टवेयर और IT-enabled services के निर्यात से जुड़ी हैं। इस तरह के सर्वे से केंद्रीय बैंक को देश के तकनीकी सेवा क्षेत्र के कारोबार, विदेशी आय और बदलते रुझानों को समझने में मदद मिलती है।
221.4 अरब डॉलर का आंकड़ा यह भी बताता है कि भारतीय IT कंपनियों की वैश्विक बाजार में मांग बनी हुई है। हालांकि, वैश्विक अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव और तकनीकी क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों के कारण इस क्षेत्र के सामने प्रतिस्पर्धा भी लगातार बढ़ रही है।
AI ने बढ़ाए नए अवसर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के तेजी से विस्तार ने IT उद्योग का कामकाज बदलना शुरू कर दिया है। अब कंपनियों की मांग केवल पारंपरिक सॉफ्टवेयर सेवाओं तक सीमित नहीं है। AI, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी, डेटा एनालिटिक्स और ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में भी नए अवसर बन रहे हैं।
भारतीय IT कंपनियां इन क्षेत्रों में अपनी सेवाओं का विस्तार कर रही हैं। आने वाले समय में तकनीकी क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा इस बात पर भी निर्भर करेगी कि कंपनियां नई तकनीकों को कितनी तेजी से अपनाती हैं और ग्राहकों को अधिक मूल्य वाली सेवाएं उपलब्ध कराती हैं।
रोजगार और युवाओं के लिए क्यों अहम है IT सेक्टर?
भारत में IT सेक्टर बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराता है। इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस से जुड़े पेशेवरों के अलावा डिजिटल मार्केटिंग, डिजाइन, डेटा, साइबर सिक्योरिटी और तकनीकी सहायता जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।
हालांकि, सॉफ्टवेयर निर्यात में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि को सीधे रोजगार में उतनी ही प्रतिशत बढ़ोतरी के रूप में नहीं देखा जा सकता। AI और ऑटोमेशन के बढ़ते इस्तेमाल से कई प्रक्रियाओं में कम कर्मचारियों की जरूरत पड़ सकती है, जबकि दूसरी ओर नई तकनीकों से नए प्रकार की नौकरियां भी पैदा हो सकती हैं।
भारत के लिए आगे की चुनौती
भारतीय IT उद्योग के सामने अब केवल निर्यात बढ़ाने की चुनौती नहीं है। वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए उच्च गुणवत्ता वाली तकनीकी सेवाओं, नए उत्पादों और AI आधारित समाधानों पर पकड़ मजबूत करना भी जरूरी होगा।
अमेरिका और यूरोप जैसे प्रमुख बाजारों में आर्थिक परिस्थितियां, कंपनियों का IT बजट, मुद्रा विनिमय दर और वैश्विक तकनीकी निवेश भारत के सॉफ्टवेयर निर्यात को प्रभावित कर सकते हैं।
221.4 अरब डॉलर का आंकड़ा क्या बताता है?
वित्त वर्ष 2025-26 में सॉफ्टवेयर और IT-enabled services का निर्यात 221.4 अरब डॉलर पहुंचना भारतीय सेवा क्षेत्र की वैश्विक पहुंच को दिखाता है। 8.2 प्रतिशत की वृद्धि यह बताती है कि बदलते तकनीकी माहौल के बावजूद भारतीय IT सेवाओं की अंतरराष्ट्रीय मांग बनी हुई है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले वर्षों में भारत अपनी IT सेवाओं को पारंपरिक आउटसोर्सिंग से आगे ले जाकर AI, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी और अन्य उभरती तकनीकों में कितनी मजबूती से स्थापित करता है।
फिलहाल RBI का यह आंकड़ा भारतीय IT उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है और यह बताता है कि वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है।















