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जहां ऑरंगुटान होते ही नहीं, वहां मिले 5 मासूम बच्चे… आखिर ओडिशा के जंगल तक कैसे पहुंचे?

ओडिशा के बालासोर जिले में मंगलवार को वन विभाग के गश्त के दौरान पांच छोटे ऑरंगुटान मिले हैं. इनमें तीन नर और दो मादा हैं और उनकी उम्र करीब 6 महीने से 1 साल के बीच बताई गई है. सबसे हैरान करने वाली बात सिर्फ यह नहीं थी कि ये पांचों बच्चे जंगल में अकेले पाए गए, बल्कि यह थी कि ऑरंगुटान भारत के मूल निवासी ही नहीं हैं.

बालासोर से सुमात्रा द्वीप की हवाई दूरी करीब 2,700 से 2,900 किलोमीटर है, जबकि बोर्नियो द्वीप करीब 3,700 से 3,800 किलोमीटर दूर है. यही वे इलाके हैं जहां ऑरंगुटान प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं. ऐसे में इतने हजार किलोमीटर दूर ओडिशा के एक जंगल में पांच नन्हे ऑरंगुटानों का एक साथ मिलना कई सवाल खड़े करता है.

वन विभाग के मुताबिक, पांचों ऑरंगुटान को बालासोर के उदयपुर-तालसारी वन क्षेत्र में एक कैसुअरिना प्लांटेशन से बरामद किया गया. ये सभी जलेश्वर रेंज के उदयपुर सेक्शन में नियमित गश्त के दौरान वन कर्मचारियों की नजर में आए. अधिकारियों के अनुसार, इनकी उम्र करीब छह महीने से एक साल के बीच है. क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक प्रकाश चंद गोगिनेनी ने पुष्टि की कि सभी पांचों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है.

भारत में ऑरंगुटान पहुंचे कैसे?

यही सवाल अब पूरे मामले का सबसे बड़ा रहस्य बना हुआ है. ऑरंगुटान दक्षिण-पूर्व एशिया के मूल निवासी हैं. ये मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया के बोर्नियो और सुमात्रा द्वीपों के वर्षावनों में पाए जाते हैं. दुनिया में ऑरंगुटान की तीन मान्यता प्राप्त प्रजातियां हैं बोर्नियन, सुमात्रन और तापनुली. इनका पूरा जीवन घने उष्णकटिबंधीय जंगलों से जुड़ा होता है. ये अपना ज्यादातर समय पेड़ों पर बिताते हैं और फल, पत्तियां तथा दूसरी वनस्पतियां खाते हैं. ऐसे में ओडिशा के एक जंगल में इनका मिलना स्वाभाविक घटना नहीं माना जा रहा है. वन अधिकारियों को आशंका है कि इन ऑरंगुटानों को इंसानों के जरिए भारत लाया गया होगा.

क्या तस्करी की कोशिश हुई थी?

क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक प्रकाश चंद गोगिनेनी ने इसे तस्करी से जुड़ी नाकाम कोशिश होने की आशंका जताई है. उनका मानना है कि जानवरों को कहीं ले जाया जा रहा था, लेकिन किसी वजह से उन्हें रास्ते में ही छोड़ दिया गया. हालांकि, अधिकारियों ने साफ किया है कि अभी तक तस्करी को लेकर कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है. बालासोर के डीएफओ इंदलकर प्रतीक प्रकाश के मुताबिक, जब वन विभाग की टीम को ये छोटे ऑरंगुटान मिले, तब वे ज्यादा हिल-डुल नहीं रहे थे, लेकिन सक्रिय थे. उन्हें खाना दिया गया और सुरक्षित तरीके से सेक्शन ऑफिस लाया गया.

अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती अनुमान के मुताबिक इन्हें संभवतः सोमवार रात या मंगलवार सुबह वहां छोड़ा गया होगा. यह भी जांच की जा रही है कि वे भारत में कैसे पहुंचे और उन्हें वहां कौन छोड़कर गया.

समुद्र किनारे से लाए गए थे क्या?

जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना भी है कि इन ऑरंगुटानों को भारत में किस रास्ते से लाया गया. अधिकारियों के पास फिलहाल इनके भारत पहुंचने के स्थान को लेकर कोई ठोस सुराग नहीं है. चूंकि बालासोर का इलाका समुद्र तट के करीब है, इसलिए तटीय क्षेत्रों को भी जांच के दायरे में रखा गया है. ओडिशा के वन एवं पर्यावरण मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया ने मामले की जांच के लिए अलग टीम भेजी है. यह टीम बडापाई-रानाकथा इलाके में भी जांच कर रही है, ताकि पता लगाया जा सके कि इन जानवरों को वहां तक कैसे लाया गया और इसके पीछे कौन लोग हो सकते हैं.

पांचों ऑरंगुटान अब सुरक्षित

रेस्क्यू किए गए पांचों ऑरंगुटान को नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क भेज दिया गया है, जहां उनका मेडिकल चेकअप किया गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, उनके शरीर पर कोई दिखाई देने वाली चोट नहीं मिली है. फिलहाल पांचों की हालत सुरक्षित बताई जा रही है. लेकिन इनके जंगल में मिलने से एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा हो गया है आखिर अपने प्राकृतिक घर से हजारों किलोमीटर दूर ये नन्हे ऑरंगुटान ओडिशा के जंगल तक पहुंचे कैसे?

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